हिमाचल विधानसभा: विस अध्यक्ष ने सुधीर शर्मा के विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नोटिस को किया खारिज
प्रदेश विधानसभा में भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नोटिस को खारिज कर दिया गया।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नोटिस को खारिज कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि उन्हें कुछ विधायकों से बिना किसी प्रासंगिक नियम का हवाला दिए अर्ध सरकारी (डीओ) नोट प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे संदेशों पर विचार नहीं किया जाएगा।मंगलवार को सदन में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने उन्हें एक डीओ पत्र सौंपा था। इसमें सदन के नेता के खिलाफ अवमाननापूर्ण आरोप थे।
लेकिन समर्थन में कोई नियम या सबूत नहीं दिए गए। पठानिया ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यह सदन की अवमानना है और इसलिए वह इसे पूरी तरह से खारिज करते हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सदस्य विधानसभा में जनहित के मुद्दे उठाने के लिए स्वतंत्र हैं। इस मंच का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं कर सकते। हल्के मूड में कुछ भी कहा जा सकता है, लेकिन सदन नियमों का हवाला दिए बिना मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं दे सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी दलीलें उल्लंघन के दायरे में आती हैं और इन्हें खारिज कर दिया जाएगा।
रिकॉर्ड के अनुसार संपादित करने के बाद ही चलाए जा सकते हैं वीडियो
पठानिया ने कहा कि सदन की कार्यवाही को यूट्यूब चैनल के माध्यम से केवल तभी प्रसारित किया जा सकता है, जब हर सदस्य के भाषण को सदन के रिकॉर्ड के अनुसार संपादित किया जाए। उन्होंने कहा कि सदस्यों के भाषण बिना संपादित किए प्रेस में नहीं जाएंगे और प्रसारण से पहले उनकी पुष्टि की जाएगी।
भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था। सोमवार को विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष को भेजे पत्र में सदन में कई बार गुमराह करने वाली जानकारियां देने का आरोप लगाया था। सुधीर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से इस नोटिस की जानकारी सार्वजनिक की थी। विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में सुधीर ने रोजगार, आदर्श स्वास्थ्य संस्थान, दस गारंटियों समेत विभिन्न मुद्दों पर सदन को गुमराह करने के आरोप लगाए।
भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि नियमों के तहत विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया जाएगा। मंगलवार को जारी बयान में सुधीर शर्मा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का यह अधिकार है कि वह प्रिविलेज को खारिज करें या कमेटी को भेजें। उन्होंने नियमों की बात की है तो अब दोबारा से नियमों के तहत प्रिविलेज प्रमोशन को लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कोई व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि प्रदेश के बेरोजगारों से जुड़ा हुआ मामला है। मुख्यमंत्री के पद की गरिमा है और उसका उन्हें ख्याल रखना चाहिए। सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर ऐसी ही स्थिति रहती है तो विधानसभा में सत्र एवं प्रश्नकल का क्या औचित्य है। सवाल पूछने से अच्छा है कि आरटीआई के माध्यम से ही हम सूचना लें।