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हिमाचल विधानसभा सत्र: स्टांप ड्यूटी बढ़ाने के विरोध में सदन में भाजपा की नारेबाजी, किया वाकआउट

Sat, 23 Sep 2023 07:58 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 23 Sep 2023 07:58 PM IST
सार

शनिवार को प्रश्नकाल के बाद यह तनातनी उस वक्त हंगामे में बदल गई, जब राजस्व मंत्री ने दो अलग-अलग विधेयक पारित करने के प्रस्ताव रखे। 

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Himachal Assembly session: ruckus in the House over Indian Stamp Himachal Pradesh Amendment Bill
विपक्ष ने किया वाकआउट - फोटो : संवाद

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मानसून सत्र के छठे दिन की बैठक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक से शुरू हुई। शनिवार को प्रश्नकाल के बाद यह तनातनी उस वक्त हंगामे में बदल गई, जब राजस्व मंत्री ने दो अलग-अलग विधेयक पारित करने के प्रस्ताव रखे। यह हंगामा भोजनावकाश से पहले और बाद में हुआ। 50 लाख रुपये से ऊपर की जमीन की खरीद-फरोख्त की रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी आठ प्रतिशत करने के संशोधन विधेयक को पारित करने का विरोध करते हुए विपक्ष सदन में नारेबाजी करता रहा। इसके पारण को भोजनावकाश के बाद के लिए स्थगित किया गया तो उस वक्त भी हंगामे और नारेबाजी के बाद भाजपा विधायक दल ने सदन से वाकआउट कर दिया।

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विपक्ष ने इस विधेयक को जनविरोधी करार दिया तो इस विधेयक के पारण से पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने महिलाओं के नाम पर 80 लाख रुपये की रजिस्ट्री करने की सूरत में केवल चार फीसदी स्टांप ड्यूटी रखने का एलान किया और कहा कि सरकार ने महिलाओं का ध्यान रखा है, जबकि विपक्ष महिला विरोधी है। शनिवार को सदन की कार्यवाही 11 बजे शुरू हुई तो प्रश्नकाल में पहले सवाल पर ही मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर आमने-सामने हो गए। यह सिलसिला पूरा दिन चला। ज्वालामुखी से कांग्रेस के विधायक संजय रतन ने आजादी के अमृत महोत्सव पर हुए खर्च पर सवाल पूछा। इस पर मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष में खूब नोकझोंक हुई। सदन में नियम 130 के तहत प्रदेश में गोशाला और गो सेंक्चुरी निर्माण के बारे में नीति बनाने का मामला भी उठाया गया। इससे सड़कों पर लावारिस घूमते पशुओं के पुनर्वास के लिए ठोस नीति बनाने का मामला उठाया गया।
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विधेयकों के पारण के समय इस तरह हुआ हंगामा
भोजनावकाश से पहले राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने दो विधेयकों को पारित करने का प्रस्ताव रखा तो विपक्ष ने विरोध किया। नेगी ने सदन में भारतीय स्टांप हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक 2023 को पारित करने का प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष ने स्टांप ड्यूटी बढ़ने से आम जनता पर बोझ डालने की बात की। इस पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने इसके पारण को भोजनावकाश के बाद टालने का अनुरोध किया। भोजनावकाश के बाद इसे पारित करने का प्रस्ताव हुआ तो इस पर भाजपा के सदस्य विरोध करते रहे। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इसे जनविरोधी बताते हुए कहा कि इस विधेयक का परिचय ही नहीं दिया जाना चाहिए था। इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में खूब नोकझोंक होती रही।
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विरोध में विपक्ष के सदस्यों ने वाकआउट किया तो सत्ता पक्ष ने इस विधेयक को विपक्ष की गैरहाजिरी में ही ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश भू राजस्व संशोधन विधेयक-2023 का भी विपक्ष ने विरोध किया। राजस्व मंत्री ने ही इसे पारित करने का प्रस्ताव रखा। विपक्ष ने राजस्व विभाग में कर्मचारियों की कमी के चलते इसे लागू करने में बाधा आने की बात की तो राजस्व मंत्री बोले कि यह विधेयक आम आदमी को लाभ देने के लिए है। मुख्यमंत्री बोले कि 69 साल बाद इस विधेयक में संशोधन हो रहा है। उन्होंने कहा कि निशानदेही और भूमि बंटवारा में बहुत समय लग रहा है। इससे समय बचेगा। इससे राजस्व विभाग में व्यवस्था परिवर्तन होगा। इस विधेयक को भोजनावकाश से पहले विपक्ष के सदन में विरोध के बीच ही पारित कर दिया गया।
 

बगैर परिचय करके ही गिर गया विधेयक : जयराम

वाकआउट के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मंत्री की ओर से विधेयक को मूव करने के बाद स्पीकर ने जैसे ही स्टांप ड्यूटी वाले विधेयक को सदन में परिचय के लिए रखा तो ना करने वाले भाजपा के 19 विधायक थे और हां करने वाले कांग्रेस के 17 थे।

इस प्रकार यह विधेयक बगैर परिचय करके ही गिर गया। भाजपा ने इसमें हेड काउंट मांगा और डिविजन देने की मांग की गई। जब एक बार वोटिंग हो गई तो एक ही दिन में दो बार एक विधेयक प्रस्तुत किया गया। यह विधेयक पारित नहीं किया जा सकता है, वरना इससे बड़ा मजाक नहीं हो सकता। 

नियम 130 के तहत सदन में चर्चा के लिए निर्धारित दो प्रस्ताव विलोप घोषित

स्टांप ड्यूटी से संबंधित विधेयक पर विपक्ष के वाकआउट के बाद विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने नियम 130 के तहत सदन में चर्चा के लिए निर्धारित दो प्रस्तावों को विलोप घोषित कर दिया। विस अध्यक्ष के जाने के बाद भाजपा विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने सभापति संजय रत्न के समक्ष मामला उठाया तो उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था विधानसभा अध्यक्ष ने दी है, मैं इसे बदल नहीं सकता। कोई आपत्ति है तो सोमवार को विस अध्यक्ष के समक्ष मामला उठाया जा सकता है। उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया।

भाजपा विधायक सदन में मौजूद न होने के कारण शुक्रवार से चल रही स्वास्थ्य संबंधित चर्चा, बेसहारा योजना को समाप्त करने, हिमकेयर में फंड न होने, स्टाफ की कमी और किडनी रोगों का उपचार बंद होने और भाजपा विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर, सतपाल सिंह सत्ती व रणवीर सिंह निक्का की ओर से ट्रांस्पोर्टेशन टैक्स, डीजल पर वैट व बिजली की दरों में बढ़ोतरी के कारण उद्योगों के पलायन करने की तैयारी से प्रदेश को होने वाले आर्थिक नुकसान पर चर्चा को विलोप कर दिया गया। इस दौरान विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर और अन्य भाजपा विधायकों ने चर्चा को बहाल करने की मांग की।
 

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