हिमाचल विधानसभा सत्र: मंत्री बोले- शिवा प्रोजेक्ट से हिमाचल बनेगा फल उत्पादक राज्य, लगाए जाएंगे फलदार पौधे
एशियन डेवलेपमेंट बैंक की मदद से साढ़े चार हजार हेक्टेयर भूमि पर फलदार पौधे लगाए जाएंगे। परवाणू में फल विधायन संयंत्र की क्षमता दस हजार से बढ़ाकर बीस हजार मीट्रिक टन की जाएगी। शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायक रोहित ठाकुर और रीता धीमान के सवाल पर यह जानकारी दी।
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बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा है कि शिवा प्रोजेक्ट से हिमाचल प्रदेश को फल उत्पादक राज्य बनाया जाएगा। एशियन डेवलेपमेंट बैंक की मदद से साढ़े चार हजार हेक्टेयर भूमि पर फलदार पौधे लगाए जाएंगे। परवाणू में फल विधायन संयंत्र की क्षमता दस हजार से बढ़ाकर बीस हजार मीट्रिक टन की जाएगी। शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायक रोहित ठाकुर और रीता धीमान के सवाल पर यह जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि फल राज्य के तौर पर प्रदेश विकसित नहीं हुआ है। यह हमारा दुर्भाग्य है। हिमाचल की पहचान सेब के तौर पर ही रह गई है। अब शिवा प्रोजेक्ट के तहत निचले क्षेत्रों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
जल्द ही इसको लेकर अनुबंध हो जाएगा। अधिकांश निचले क्षेत्रों को इस योजना में शामिल किया गया है। परवाणू में फल विधायन संयंत्र की स्थापना 1981 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर ने की थी। अब इस संयंत्र को अपग्रेड करने का फैसला लिया गया है। नवीनीकरण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। पराला में भी संयंत्र दो माह में चालू कर दिया जाएगा। इससे सेब खराब नहीं होंगे। परवाणू तक ढुलाई के चलते व उस संयंत्र की क्षमता कम होने से कई बार सेब काफी मात्रा में खराब हो जाते थे। बागवानाें को पराला में ही सुविधा मिल जाएगी।
विधायक रीता धीमान ने निचले क्षेत्रों से भेदभाव का उठाया मामला
इंदौरा से भाजपा विधायक रीता धीमान ने प्रदेश के निचले क्षेत्रों से भेदभाव का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि आम, संतरा, किन्नू और लीची जैसे फल प्रदेश के निचले क्षेत्रों में होते हैं। ए और बी ग्रेड के फल व्यापारी खरीद लेते हैं। इससे कम ग्रेड के फलों को मजबूरन फेंकना पड़ता है। उन्होंने कंदरोड़ी में फल विधायन संयंत्र स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सेब उत्पादकों को बर्फ-ओलावृष्टि अधिक व कम पड़ने पर मुआवजा मिलता है जबकि अन्य क्षेत्रों में कम या अधिक बारिश होने पर मुआवजा नहीं दिया जाता। इसका प्रावधान भी होना चाहिए।