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हिमाचल विधानसभा सत्र: राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर गरमाया सदन, वीडियो नहीं मिलने पर भाजपा ने किया वाकआउट

Mon, 24 Aug 2026 02:49 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 24 Aug 2026 02:49 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का मुद्दा सदन की कार्यवाही पर हावी रहा। दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। राष्ट्रगान के कथित अपमान को लेकर लगाए गए आरोपों और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग सदन में दिखाने की मांग को लेकर करीब आधे घंटे तक तीखी नोकझोंक होती रही। 

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himachal assembly monsoon session third day vande mataram controversy
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वंदे मातरम विवाद को लेकर बढ़ा सियासी तापमान। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

मानसून सत्र के तीसरे दिन सोमवार को भी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का मुद्दा सदन की कार्यवाही पर हावी रहा। दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। राष्ट्रगान के कथित अपमान को लेकर लगाए गए आरोपों और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग सदन में दिखाने की मांग को लेकर करीब आधे घंटे तक तीखी नोकझोंक होती रही। भाजपा विधायकों ने करीब आठ मिनट के लिए सदन से वाकआउट कर दिया। बाद में विपक्षी विधायक सदन में लौट आए और प्रश्नकाल की कार्यवाही आगे बढ़ी, लेकिन इस दौरान भी दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।

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नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने विपक्ष पर राष्ट्रगान के कथित अनादर के लगाए गए आरोपों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायकों ने पिछले तीन दिनों में न तो विधानसभा अध्यक्ष का अनादर किया है और न ही राष्ट्रीय प्रतीकों का। यदि विपक्ष पर किसी तरह का आरोप लगाया गया है तो उसके प्रमाण सामने रखे जाने चाहिए। उन्होंने मांग रखी कि रिकॉर्डिंग को विधानसभा की बड़ी स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाए। वीडियो सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि किसने क्या किया और किस तरह का व्यवहार हुआ। भाजपा विधायकों ने सत्ता पक्ष से राष्ट्रगान के अपमान का आरोप वापस लेने और विपक्ष से माफी मांगने की मांग भी उठाई।
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जवाब में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सदन की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग को इस तरह सदन की बड़ी स्क्रीन पर चलाने की कोई संसदीय परंपरा नहीं है। कांग्रेस राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत का सम्मान करती है। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि दो दिनों तक विपक्ष ने सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी। सोमवार को भी इनकी मंशा ऐसी ही है। शनिवार को भाजपा ने अध्यक्ष के कमरे के बाहर जाकर भी नारेबाजी की। उधर, सदन में गतिरोध के बावजूद प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू की गई। भाजपा विधायकों के हंगामे और नारेबाजी के बीच कुछ समय तक कार्यवाही चलती रही। हालांकि, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का मुद्दा पूरी तरह शांत नहीं हुआ। सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच बीच-बीच में तीखी टिप्पणियां होती रहीं।
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स्पीकर बोले- नए कानून में एक साथ राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गाने का प्रावधान नहीं
विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि नए कानून में राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रगीत गाने का कोई प्रावधान नहीं है। विधानसभा यह स्वयं तय करेगी कि किसे पहले और बाद में गाया जाना है। पुरानी परंपरा रही है कि पहले राष्ट्र गान होता है फिर राष्ट्र गीत। अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि मानसून सत्र के समापन पर वंदेमातरम के सभी छंद गाए जाएंगे। नए कानून में राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत के अपमान पर सजा का प्रावधान किया गया है। हालांकि हर घर तिरंगा अभियान के तहत अब दिन-रात ध्वज फहराया जा रहा है। अध्यक्ष ने कहा कि शुक्रवार को राष्ट्र गान के दौरान सभी खड़े हुए थे। जैसे ही राष्ट्र गान समाप्त हुआ तो भाजपा विधायकों ने हाथ खड़े किए, उन्हें कुछ क्षण के लिए रुकना चाहिए था। यह मामला अब यहीं समाप्त होना चाहिए। वीडियो देने का पत्र प्राप्त हुआ है, इस पर विचार हो रहा है। वीडियो भी उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

परिसर में भी सत्ता-विपक्ष आमने-सामने, अटैचियों-तख्तियों के साथ की नारेबाजी
 प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विधानसभा परिसर में भी राजनीतिक टकराव देखने को मिला। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक तख्तियां लेकर आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। काउंसिल चेंबर के बाहर काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। भाजपा विधायक इस दौरान प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर अटैचियां लेकर विधानसभा पहुंचे। विपक्ष ने प्रदेश सरकार पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए दावा किया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर अटैचियों में भरकर पैसा मुख्यमंत्री कार्यालय और कांग्रेस नेतृत्व तक पहुंचाया जा रहा है। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है और इसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ नेता और पूर्व सीपीएस नीरज भारती ने सरकार में अटैचियों के माध्यम से धन के लेनदेन के आरोप लगाए थे। जयराम आरोप लगाया कि प्रदेश के इतिहास में इतना संगठित भ्रष्टाचार पहले कभी नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि कबाड़ नीति, विभिन्न सरकारी नियमों, स्वास्थ्य और शिक्षा विभागों में खरीद-फरोख्त तथा आउटसोर्स नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। विपक्ष सदन में विभिन्न जनहित के मुद्दों पर चर्चा चाहता है और इसके लिए नोटिस भी दिए गए हैं, लेकिन सरकार चर्चा से बचने का प्रयास कर रही है। उधर, भाजपा के प्रदर्शन के जवाब में कांग्रेस विधायक दल भी तख्तियां लेकर विधानसभा परिसर पहुंचा। सत्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेश के हितों की बात करने के बजाय केंद्र सरकार के स्तर पर हिमाचल के अधिकारों और वित्तीय सहायता को प्रभावित कर रही है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि भाजपा एक ओर हिमाचल के हितों की बात करती है, दूसरी ओर दिल्ली में प्रदेश के अधिकारों को रोकने का प्रयास करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की ओर से घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता अब तक राज्य को नहीं मिली है। इसके अलावा आरडीजी बंद करने और राज्य में पुरानी पेंशन योजना लागू होने के बाद वित्तीय सहयोग प्रभावित हुआ है। वर्तमान सरकार हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ रही है। जल विद्युत परियोजनाओं में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने और वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में हिमाचल के अधिकार सुनिश्चित करने जैसे मामलों में सरकार को सफलता मिली है। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा से बचने के लिए सदन नहीं चलने देना चाहती, जबकि मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष ही व्यवधान उत्पन्न कर रहा है।
 

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