सियासत के रंग: बड़े नेताओं ने पहली दफा नहीं मारी ऐन मौके पर पलटी
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राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पूर्व संचार मंत्री पंडित सुखराम अपने पुत्र अनिल शर्मा और प्रदेश कांग्रेस सचिव एवं पोते आश्रय के साथ चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हो गए हैं। बड़े नेताओं का पलटी मारना कोई पहली दफा नहीं है।
58 में से 10 विधानसभा सीटों के साथ प्रदेश में सत्ता की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले मंडी जिले के कांग्रेस और भाजपा नेताओं में दल बदलने का पुराना प्रचलन रहा है।
वर्ष 1967 से लेकर अब तक राजनीति में पकड़ बना चुके कई ऐसे दिग्गज नेता हैं, जो कभी कांग्रेस, भाजपा और आजाद या हिमाचल विकास कांग्रेस का दामन थामकर चुनावी समर में उतरे। सियासी शतरंज में विरोधियों को शह और मात देने के लिए कोई किसी दायरे से बंधा नही रहा।
मंडी सदर सीट से एक बार भी नहीं हारे सुखराम
मंडी सदर से अब तक जीत का एकाधिकार रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम 1967 से 1998 तक कांग्रेस में रहे। घोटालों में घिरने के बाद इन्होंने 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस पार्टी बना ली। 1998 से 2007 तक इसी पार्टी पर दांव खेला और जीते।
1993 में इनके बेटे अनिल शर्मा कांग्रेस टिकट पर जीते। 2007 और 2012 के चुनावों में उन्होंने भी जीत का सिलसिला जारी रखा और मंत्री पद हासिल किया।
अब 2017 के चुनावों से पहले पंडित सुखराम अपने पोते और बेटे के साथ भाजपा में शामिल हो गए। मंडी सदर से 11 विधानसभा चुनावों में छह बार पंडित सुखराम और 3 बार अनिल शर्मा ने जीत हासिल की। पंडित सुखराम एक बार भी नहीं हारे हैं।
1977 में जनता पार्टी से पहला चुनाव जीते थे गुलाब सिंह
1977 में जनता पार्टी से पहला चुनाव जीते थे गुलाब सिंह
वर्ष 1998 में कांग्रेस सरकार में राजस्व मंत्री और 2007 में भाजपा के राजस्व मंत्री रहे जोगिंद्रनगर से भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री गुलाब सिंह ने 1977 में जनता पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ा और जीते। 1982 में आजाद उम्मीदवार जीत हासिल की।
1990 में कांग्रेस टिकट से जीते। 1993 और 1998 में कांग्रेस टिकट पर जीते और मंत्री बने। 2003 में भाजपा में शामिल हुए और हार का मुंह देखना पड़ा। साल 2007 और 2012 में भाजपा को जीत दिलाई। 1977 में राजनीति में पदार्पण करने के बाद गुलाब सिंह महज एक बार हारे हैं।
महेंद्र सिंह ने कई दल बदले
धर्मपुर के विधायक और पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह ऐसे नेता हैं, जो आजाद, हिविकां, एनएमएचपी और भाजपा यानी लगभग सभी राजनीतिक पार्टियों से चुनाव लड़ चुके हैं। वर्ष 1990 में बतौर आजाद उम्मीदवार, 1993 में कांग्रेस, 1998 में हिविकां, 2003 में लोक मंच हित पार्टी और 2007 और 2012 में भाजपा से चुनाव जीते हैं। 2007 में महेंद्र सिंह परिवहन मंत्री रहे हैं। इससे पहले वे 1998 में आबकारी मंत्री रहे हैं।
सीपीएस मनसाराम भी बदल चुके हैं दल
सीपीएस और करसोग से कांग्रेस विधायक मनसा राम भी हिविकां से बतौर आजाद उम्मीदवार चुनावी मैदान में कूद चुके हैं। 1967 में बतौर आजाद राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले मनसाराम 1972 में कांग्रेस से लड़े और जीते। उसके बाद 1982 में वे आजाद जीते। 1998 में वह सुखराम की पार्टी हिविकां से जीते और 2012 में यह कांग्रेस से जीते।
ये भी हुए हैं कभी इधर-उधर
आबकारी एवं कराधान मंत्री एवं बल्ह के विधायक प्रकाश चौधरी का पदार्पण पंडित सुखराम की पार्टी हिविकां से 1998 में हुआ। 2003 में भी हिविकां से चुनाव लड़ा और 100 से कम वोटों के आंकड़े से हारे। इसके बाद इन्होंने कांग्रेस का दामन थामा।
सिराज के पूर्व विधायक मोतीराम भी जनता दल, आजाद और कांग्रेस से चुनाव लड़े। इसके अलावा मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार रंगीलाराम राव भी 1972 में आजाद जीतने के बाद कांग्रेस में शामिल हुए। नाचन के पूर्व विधायक टेक चंद डोगरा भी 1993 में कांग्रेस को छोड़ आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़े। उसके बाद दोबारा उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी।