हिमाचल विधानसभा चुनाव में ओबीसी वोट बैंक पर टिकीं निगाहें
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विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल हिमाचल में ओबीसी के करीब 18 फीसदी वोट बैंक को केंद्रित कर सियासी अखाड़े में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ओबीसी कोटे में कोटा देने और केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रपति बनने की दौड़ में शामिल रहे ओबीसी के कद्दावर भाजपा नेता थावर चंद गहलोत को हिमाचल प्रभारी बनाने की रणनीति भी चुनाव में सियासी फसल काटने के संकेत दे रही है।
एक वक्त करीब एक दर्जन ओबीसी विधायकों का आंकड़ा वर्ष 2012 में घटकर करीब 4 रहने का रंज लिए ओबीसी समुुदाय ने चुनाव से पहले घृत बाहती चाहंग महासभा का गठन कर हिमाचल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। 18 फीसदी ओबीसी वोट बैंक हिमाचल के 7 जिलों की करीब 29 सीटों पर खासा प्रभाव डालता है।
ओबीसी नेता एवं घृत बाहती चाहंग महासभा के प्रदेशाध्यक्ष श्रीकंठ चौधरी का कहना है कि राजनीतिक दल ओबीसी समुदाय की अनदेखी करते हैं। टिकट आवंटन में भी समुदाय नजरअंदाज हो रहा है। ओबीसी वित्त विकास निगम के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री चंद्र कुमार कहते हैं कि हिमाचल में ओबीसी समुदाय की अच्छी पैठ है।
कांगड़ा और ऊना में सबसे ज्यादा ओबीसी
सरकार की ओर से ओबीसी वर्ग के कल्याण के लिए बनाए गए निगम की मानें तो कांगड़ा जिले में 50, ऊना में 40, सिरमौर में 19, हमीरपुर में 22, शिमला में 3.8, सोलन में 11, मंडी 5, चंबा में 3, बिलासपुर में 7 और कुल्लू जिले में 2 फीसदी ओबीसी समुदाय के लोग रहते हैं।
ऊना के हरोली, ऊना और गगरेट, सिरमौर के नाहन और पांवटा साहिब, सोलन के नालागढ़ और दून, मंडी के जोगिंद्रनगर, मंडी, सुंदरनगर, हमीरपुर के नादौन, सुजानपुर में ओबीसी वोट बैंक का दबदबा है।
कांगड़ा में सत्ता तय करता है ओबीसी
कांगड़ा की बैजनाथ, जयसिंहपुर और इंदौरा को छोड़कर 13 विस सीटों पर ओबीसी का प्रभाव है। नगरोटा बगवां और कांगड़ा में 60-60 फीसदी वोट बैंक ओबीसी वर्ग का है।
सुलह में 40, धर्मशाला में 40, शाहपुर में 50, जवाली में 45, देहरा में 20, नूरपुर में 20, सुलह में 50, पालमपुर में 15, फतेहपुर में करीब 13 फीसदी वोट बैंक ओबीसी वर्ग का है । यानी, हिमाचल में किसी भी दल को सत्ता की चाबी ओबीसी वोट बैंक के पास है।
इस बार 4 एमएलए, नहीं मिला मंत्री पद
वर्तमान में सरकार में ओबीसी समुदाय से चार विधायक सरवीण चौधरी, नीरज भारती, पवन काजल और जगजीवन पाल हैं। इससे पहले एमएल चौधरी, हरिराम, चौधरी हरदयाल, सरवण कुमार, विद्यासागर, रमेश धवाला, चंद्र कुमार, नारायण चंद्र पराशर, राम चंद भाटिया, सुरेंद्र काकू, कैप्टन प्रताप, दौलत चौधरी, संजय चौधरी, सुखराम चौधरी मंत्री और विधायक रह चुके हैं।
चुनाव से पहले ब्राह्मण मंत्रियों में ओबीसी पर खींचतान
प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में कांग्रेस में ओबीसी के सबसे बड़े नेता बनने की होड़ चुनाव से एक साल पहले ही शुरू हो गई। जहां ओबीसी समुदाय में ब्राह्मण वर्ग से ताल्लुक रखने वाले जीएस बाली के वर्चस्व को तोड़ने के लिए सुधीर शर्मा ने पवन काजल, नीरज भारती को साथ लेकर समुदाय का बड़ा सम्मेलन करवाया, वहीं चुनाव से पहले समुदाय से घृत बाहती चाहंग महासभा का गठन कर लिया गया।