हिमाचल विधानसभा बजट सत्र: कर्ज को लेकर सदन में हुआ हंगामा, नारेबाजी के बाद विपक्ष ने किया वाकआउट
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व कांग्रेस ने तय सीमा से ज्यादा ऋण लिया है, जबकि वर्तमान सरकार ने पिछले सवा चार साल में केंद्र सरकार की तय सीमा से कम ऋण लिया। वर्तमान में 62 हजार करोड़ का कर्जा है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सदन में झूठे आंकड़े पेश न करें।
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हिमाचल प्रदेश पर बढ़ते कर्जे को लेकर मंगलवार को विपक्ष के विधानसभा में बजट सत्र के दौरान जबरदस्त हंगामे और नारेबाजी से माहौल गरमा गया। बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वाकआउट कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व कांग्रेस ने तय सीमा से ज्यादा ऋण लिया है, जबकि वर्तमान सरकार ने पिछले सवा चार साल में केंद्र सरकार की तय सीमा से कम ऋण लिया। वर्तमान में 62 हजार करोड़ का कर्जा है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सदन में झूठे आंकड़े पेश न करें।
इस पर सत्ता पक्ष के विधायक और कांग्रेस विधायक आपस में उलझते रहे। विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने दोनों पक्ष के सदस्यों को बैठने के लिए कहा। विपक्ष मुख्यमंत्री से आश्वासन चाहता था कि सरकार इस वित्त वर्ष कोई ऋण नहीं लेगी। यह आश्वासन न मिलने से नाराज विपक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट किया। सीएम ने कहा कि सत्य सामने आने से तकलीफ होती है। विपक्ष के वाकआउट की वह कड़ी निंदा करते हैं।
राज्य को प्राप्त केंद्रीय धनराशि पर श्वेतपत्र लाए सरकार : अग्निहोत्री
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्रीय मदद और वित्तीय प्रबंधन पर प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा है कि 14वें वित्त आयोग से प्राप्त कुल धनराशि और 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार केंद्र से जारी की धनराशि पर भ्रम की स्थिति सरकार ने बना रखी है। सरकार को केंद्र से मिली धनराशि पर श्वेतपत्र लाना चाहिए। श्वेतपत्र लाते ही राज्य सरकार का झूठ सामने आ जाएगा। राजधानी शिमला में जारी बयान में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर वित्तीय प्रबंधन में अपनी विफलता को छिपाने के लिए झूठ बोल रहे हैं। सरकार की ओर से उठाए ऋण के मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
भाजपा सरकार बार-बार एफआरबीएम अधिनियम की धज्जियां उड़ा रही है, जो वित्तीय प्रबंधन की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस साल केंद्रीय बजट में भारत सरकार ने घोषणा की है कि राजकोषीय घाटा 4 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ना चाहिए। इसके बावजूद हिमाचल सरकार ने 2022-23 के लिए राजकोषीय घाटा 4.98 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। इस वित्तीय प्रबंधन में जयराम सरकार की अनुभवहीनता सामने आई है, जो राज्य को दिवालिया बनाने की ओर धकेल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को यह स्वीकार करना चाहिए कि कुप्रबंधन के कारण वित्तीय स्थिति खराब हो गई है। केंद्र सरकार ने 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्य को धन नहीं दिया है।