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श्रीकांत, शशि पहुंचे संगीत और साहित्य के शिखर पर
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 31 May 2015 12:03 PM IST
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‘पर्वत की गूंज’ रेडियो कार्यक्रम के लिए जाने जाते हैं एस शशि- हिमाचल के लोकसंगीत एवं पहाड़ी भाषा में रचे गए गीतों आदि के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियों एवं समग्र योगदान के लिए प्रदेश के वरिष्ठ संगीतकार एस. शशि को प्रदान किया जाएगा। यह पुरस्कार हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी की ओर से दिया जाएगा। 75 वर्षीय एस शशि मूल रूप से सोलन जिले की अर्की तहसील के बातल क्षेत्र के मूल निवासी हैं।
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एस शशि ने कहा कि उनका कैरियर रेडियो से एक कै जुअल आर्टिस्ट के रूप में शुरू हुआ। शुरू में उन्होंने संगीत की कंपोजिंग की। इसके बाद संगीत निर्देशन किया। पहाड़ी संगीत का भी निर्देशन किया। कई कलाकारों के गायन को उन्होंने संगीत दिया। एस. शशि ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में संगीत की कंपोजिंग की। वहां फ्री लांसर की तरह कार्यक्रम भी देते रहे। 1965 में वह जालंधर लौटे।
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इसके बाद उन्होंने जालंधर से ही ‘पर्वत की गूंज’ प्रोग्राम शुरू किया। इसमें कई पहाड़ी कलाकारों को आकाशवाणी से गायन का अवसर मिला। वहां वह बतौर प्रोड्यूसर और संगीत निर्देशक काम करते रहे। वहां वह नियमित तौर पर रेडियो से जुड़ चुके थे। बाद में 1970 में शिमला आए। यहां भी आकाशवाणी में काम किया। बहुत से कलाकारों को जैसे हेमंत कुमार, बेगम अख्तर, महेंद्र कपूर आदि की भी शिमला में रिकार्डिंग की।
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अब सेवानिवृत्ति को भी एक अरसा हो गया है, मगर जब मन करता है तो एस शशि मुंबई, दिल्ली आदि में कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। एस शशि ने कहा कि उनकी पत्नी शकुंतला शशि शिमला में उनके साथ हैं। दो बेटों में पंकज दिल्ली में मीडिया में हैं और अजय शर्मा भी एक प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत हैं।
दो और पुस्तकें पाइपलाइन में हैं श्रीनिवास श्रीकांत की- अकादमी का दूसरा ‘भाषा, साहित्य शिखर सम्मान’ हिंदी भाषा में रचित साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियों एवं समग्र योगदान के लिए हिमाचल प्रदेश के साहित्यकार श्रीनिवास श्रीकांत को प्रदान किया जाएगा। 78 वर्षीय श्रीनिवास श्रीकांत वर्तमान में धर्मपत्नी निर्मल शर्मा के साथ चक्कर में रह रहे हैं। बच्चे लुधियाना और गुड़गांव में अपने-अपने व्यवसाय में जुडे़ हैं।
उन्होंने 1954 से लिखना शुरू किया। वर्ष 1995 से लेकर तो वह लगातार लेखन कार्य में व्यस्त हैं। श्रीनिवास श्रीकांत ने कहा कि उनकी लिटरेचर की दो किताबें पाइप लाइन में हैं। एक कविता संग्रह है तो दूसरी पुस्तक वह मुक्तिबोध पर लिख रहे हैं। श्रीनिवास श्रीकांत कई वर्षों पहले एचपीएमसी शिमला के पीआरओ पद से रिटायर हुए थे। श्रीकांत बोले कि उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद ही लेखन पर अधिक ध्यान दिया है।
वह विदेशी साहित्य का भी खूब अध्ययन करते रहे हैं। वह मॉडर्न पैंटिंग पर भी खूब पढ़ते रहे हैं। वह ड्रामा, क्लासिकल गीत आदि भी रचते रहे हैं। अब तक उनकी नौ पुस्तकें छप चुकी हैं। श्रीनिवास ने इस पुरस्कार पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से मना किया और साथ ही बोले कि यह उम्र ही ऐसी है कि इसमें कोई कंट्रोवर्सी नहीं होनी चाहिए। वह बोले - पुरस्कार पर क्या कहूं, लिटरेचर पर कुछ कहना है तो बताता हूं।