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अस्पताल जा रहे हैं तो पढ़ लें ये खबर

Fri, 28 Nov 2014 09:39 AM IST
Updated Fri, 28 Nov 2014 09:39 AM IST
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hike in users charges in hospital himachal cabinet

हिमाचल प्रदेश के मध्यम वर्ग के मरीजों का इलाज और महंगा हो सकता है। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने और गुणवत्ता में सुधार के लिए यूजर्स चार्जेज बढ़ाए जा सकते हैं। पीटरहाफ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इसके संकेत हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य आयोग ने दिए। आयोग के चेयरमैन डा. एमके भान ने कहा कि जो लोग यूजर्स चार्जेज का भुगतान कर सकते हैं, उन्हें सरकार की ओर से सब्सिडी देने की क्या जरूरत है।

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भान ने कहा कि केवल गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले लोगों को ही फ्री में स्वास्थ्य सेवाएं देने की जरूरत है। ‘स्टैंडर केयर स्टैंडर कास्ट’ फारमूले पर काम हो तो बेहतर रिजल्ट सामने आएगा। हिमाचल प्रदेश में संस्थान तो अच्छे बनकर तैयार हैं, लेकिन डाक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। इनकी पूर्ति के लिए भी सुझाव दिया जाएगा। इस कमी को कैसे पूरा किया जा सकता है, यह भी सरकार को बताया जाएगा।
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गुणवत्ता सुधारने पर किया जाएगा फोकस

hike in users charges in hospital himachal cabinet

आयोग की ओर से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार करने पर फोकस किया जाएगा। ऐसी सिफारिश की जाएगी, जिससे अगले पांच साल बाद प्रदेश के किसी भी मरीज को प्रदेश से बाहर इलाज कराने के लिए जाने की जरूरत न पड़े।

अगले पांच साल की क्या चुनौतियां हैं और अगले 20 साल में क्या प्राथमिकताएं रहेंगी, इस पर भी मंथन किया जा रहा है। जन्म लेने वाले बच्चे स्वस्थ रहें, इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य विनीत चौधरी भी मौजूद रहे।

आयोग ने इनसे ली राय

मुख्यमंत्री, वित्त विभाग, आईपीएच, शहरी विकास, ग्रामीण विकास, डाक्टर प्रतिनिधियों, मेडिकल कालेजों के प्रतिनिधियों और एनजीओ के प्रतिनिधियों से आयोग ने राय ली है।

कहां से आएगा धन, चाहिए 112 करोड़

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सरकार की ओर से गठित स्वास्थ्य आयोग हिमाचल की सेहत को सुधारने के लिए पीएचसी, सीएचसी और सिविल अस्पतालों में स्टाफ की कमी को भरने से लेकर मरीजों को बेहतर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए संस्तुति तो दे देगा, लेकिन अहम सवाल यह है कि बजट कहां से आएगा। सरकार इसका प्रबंधन कहां से करेगी। इस सवाल का जवाब अभी तक प्रदेश सरकार की ओर से तलाशने की कोशिश नहीं की गई है।

आंकड़े के अनुसार प्रदेश में सभी हेल्थ स्टाफ भर दिए जाएं तो तकरीबन 112 करोड़ रुपये बजट की और दरकार पड़ेगी। सरकार की माली हालत ठीक नहीं है, जो तत्काल इतने धन की व्यवस्था कर पाए। ऐसे में प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में मानव संसाधन की कमी को भरपाना बेहद मुश्किल होगा। आयोग के ही एक सदस्य ने बताया कि सरकार को नए सिरे से अपने स्वास्थ्य केंद्रों के ढांचे पर विचार करने की जरूरत है।

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मेंटल हेल्थ पर रहेगा मेन फोकस

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प्रदेश में नशाखोरी बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण मानसिक दबाव बढ़ रहा है। इसे कैसे कम किया जाए। स्वास्थ्य आयोग इस पर भी विचार करेगा, जिससे इस प्रवृत्ति कम की जा सके।

विशेषज्ञ डाक्टरों पर भी अध्ययन

हिमाचल प्रदेश में विशेषज्ञ डाक्टरों की भारी कमी है। इस बिंदु पर भी आयोग विचार करेगा। जरूरत पड़ी तो कैरियर ओरिएंटेड स्कीम शुरू करने का सुझाव आयोग दे सकता है।

अतिरिक्त मुख्य स्वास्थ्य सचिव विनीत चौधरी ने बताया कि निश्चित तौर पर आयोग के सुझावों से प्रदेश पर वित्तीय भार पड़ेगा। इसे लेकर सरकार स्तर पर मंथन किया जाएगा। आयोग केवल सुझाव ही नहीं देगा, बल्कि पायलट प्रोजेक्ट भी प्रदेश में लाएगा।

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