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हिमाचल: चंडीगढ़-शिमला, किरतपुर-मनाली एनएच बहाली के लिए हाई पावर कमेटी गठित, एनएचएआई ने हाईकोर्ट को दी जानकारी
Mon, 04 Sep 2023 08:27 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 04 Sep 2023 08:27 PM IST
सार
प्रदेश में फोरलेन की बहाली के लिए हाई पावर कमेटी का गठन किया गया है। एनएचएआई ने यह जानकारी शपथपत्र दायर कर हाईकोर्ट को दी है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
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कालका-शिमला फोरलेन(फाइल)
- फोटो : संवाद
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में फोरलेन की बहाली के लिए हाई पावर कमेटी का गठन किया गया है। एनएचएआई ने यह जानकारी शपथपत्र दायर कर हाईकोर्ट को दी है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वर्चुअली अदालत के समक्ष पेश हुए। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुए प्रदेश के राजमार्गों की बहाली के लिए उचित और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। अदालत को बताया कि हाई पावर कमेटी में आईआईटी रुड़की, मंडी और एनएचएआई के सदस्यों को शामिल किया है।
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बता दें कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में 45 वर्ष के अनुभव वाले इंजीनियर की शिकायत पर अदालत ने कड़ा संज्ञान लिया है। श्यामकांत धर्माधिकारी की ओर से लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि पहाड़ों के कटान से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। प्रदेश में त्रुटिपूर्ण इंजीनियरिंग से बनाई जा रही भूमिगत सुरंगें, सड़कें और पुलों से पहाड़ों का अनियोजित उत्खनन किया जा रहा है। सड़कों में ढलान और अवैज्ञानिक तरीके से पुल और सुरंगों का निर्माण किया जाना नुकसान का कारण बनता है। अदालत को बताया कि हालांकि इंजीनियरिंग के बिना राष्ट्र निर्माण की अपेक्षा नहीं की जा सकती है।
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आज के जमाने में इंजीनियरिंग और वास्तु कला की सख्त जरूरत है। यदि इंजीनियरिंग और वास्तु कला में जरा सी भी त्रुटि पाई जाती है तो हजारों मासूमों को जान से हाथ धोना पड़ता है। तकनीक की कमी और पुराने उपयोग के कारण सड़क की रिटेनिंग दीवारें कमजोर हैं। जल निकासी के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। चिंता का विषय है कि तीन मीटर सड़क के दोनों तरफ की जमीन अतिरिक्त रूप से अधिग्रहीत की गई है। जबकि शहरों और गांवों में सर्विस लेन नहीं हैं जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा रहता है और कारण भी बनते हैं। व्यापक वनों की कटाई के कारण मिट्टी का कटाव हुआ है जो लगातार भूस्खलन आदि का कारण बन रहा है।
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