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Himachal: फोरलेन निर्माण के दौरान जंगलों और नदियों में मलबा फेंकने पर हाईकोर्ट सख्त, तलब की रिपोर्ट

Thu, 20 Jul 2023 06:20 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 20 Jul 2023 06:20 PM IST
सार

अदालत ने केंद्र सरकार के पर्यावरण विभाग और एनएचएआई को आदेश दिए हैं कि वे शपथपत्र के माध्यम से बताएं कि ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने राज्य सरकार को भी आदेश दिए हैं कि वह अदालत को बताएं कि लोनिवि के ठेकेदार को अवैध डंपिंग से रोकने के लिए क्या योजना बनाई जा रही है।

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High court strict on throwing debris in forests and rivers during forelane construction, summoned report
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने किरतपुर-मनाली फोरलेन निर्माण के दौरान जंगलों और नदियों में मलबा फेंकने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के पर्यावरण विभाग और एनएचएआई को आदेश दिए हैं कि वे शपथपत्र के माध्यम से बताएं कि ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने राज्य सरकार को भी आदेश दिए हैं कि वह अदालत को बताएं कि लोनिवि के ठेकेदार को अवैध डंपिंग से रोकने के लिए क्या योजना बनाई जा रही है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 9 अगस्त को निर्धारित की है।

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अदालत ने आदेशों में कहा कि एनएचएआई के ठेकेदारों के साथ-साथ लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार भी अवैध डंपिंग के लिए जिम्मेवार हैं। ठेकेदार नदियों के किनारे और पहाड़ियों पर अवैध डंपिंग कर रहे हैं। फोरलेन विस्थापित और प्रभावित समिति की याचिका पर अदालत ने यह आदेश पारित किए। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के बताया गया कि किरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान एनएचएआई के ठेकेदार ने जंगल में मलबा फेंक दिया है। एनएचएआई ने शपथ पत्र के माध्यम से अदालत में माना कि 12 जून 2019 को डीएफओ बिलासपुर ने मलबे की अवैध डंपिंग की शिकायत की है।
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इसके लिए एनएचएआई ने 8,45,700 रुपये की राशि जुर्माने के तौर पर जमा करवा दी है। इसी फोरलेन निर्माण से जुड़े एक अन्य मामले में फोरलेन निर्माण के मलबे को गोबिंद सागर झील में ठिकाने लगाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि गोबिंद सागर झील में अदालत की रोक के बावजूद भी अवैध डंपिंग का सिलसिला नहीं थम रहा है। अदालत को इस बारे में छपी खबरों और फोटो से अवगत करवाया गया।
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इससे साफ जाहिर हो रहा है कि झील में अवैध डंपिंग हो रही है। सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआईएफआरआई) ने भाखड़ा बांध जलाशय में मछली की आबादी में बड़ी गिरावट दर्ज की है। इसका मुख्य कारण झील में अवैध डंपिंग से गाद के स्तर में वृद्धि हुई पाया गया है। गाद की वजह से बिलासपुर जिले के सबसे बड़े जल निकाय गोबिंद सागर में विभिन्न मछली प्रजातियों के प्रजनन को नुकसान पहुंचाया गया है। आंकड़ों के हिसाब से वर्ष 2014 में कुल वार्षिक मछली उत्पादन 1,492 मीट्रिक टन से घटकर लगभग 250 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। वर्ष 2022 में तीन हजार से अधिक स्थानीय परिवारों की आजीविका को प्रभावित किया गया है।

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