प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से तलब किया ब्योरा
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हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की कमी पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी और न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिए हैं कि वह बताए कि प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कितने डॉक्टर नियुक्त किए हैं। प्रति केंद्र कितने कर्मचारियों की सेवाओं की आवश्यकता रहती है। शिमला स्थित घणाहट्टी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की कमी को उजागर करने वाली याचिका की वीडियो कांफ्रेंस से सुनवाई के बाद अदालत के यह आदेश पारित किए। जनहित में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि घणाहट्टी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत स्थायी डॉक्टर का मार्च में स्थानांतरण किया था।
उस दिन से यह स्वास्थ्य केंद्र बिना डॉक्टर के सेवाएं दे रहा है। याचिका में दलील दी है कि घणाहट्टी में लगभग 12 हजार लोगों की संख्या है। इनमें करीब बारह सौ लोग वरिष्ठ नागरिक है, जिन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर न होने के कारण परेशानी होती है। उपप्रधान की ओर से दायर याचिका में अदालत को बताया गया कि कोविड-19 के चलते जोनल अस्पताल दीनदयाल उपाध्याय को कोविड सेंटर बनाया है। इस कारण अस्पताल में आम लोगों का इलाज नहीं हो रहा है। उधर, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में आम मरीजों की संख्या ज्यादा हो गई है। हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की आगामी सुनवाई 15 जुलाई निर्धारित की है। सरकार से प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति पर जानकारी तलब की है।