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हम अंग्रेजों के जमाने में नहीं जी रहे कि सहूलियत के हिसाब से कोर्ट में पेश हों दस्तावेज: हाईकोर्ट
Tue, 03 Sep 2019 12:38 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 03 Sep 2019 12:38 PM IST
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि लोकतांत्रिक देश में निष्पक्ष ट्रायल ही नहीं बल्कि निष्पक्ष जांच का अधिकार भी मौलिक अधिकार है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने सीबीआई की ओर से जांच के समय एकत्रित किए गए दस्तावेजों को चालान के साथ पेश न करने और उन्हें प्रार्थी को नहीं दिए जाने के मामले की सुनवाई के बाद इस निर्णय को सुनवाया। अदालत ने सीबीआई की इस कार्यप्रणाली पर कड़ी प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की।
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इस मामले के अनुसार सीबीआई ने जांच के समय प्रार्थी के खिलाफ कुछ दस्तावेज एकत्रित किए थे, लेकिन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 के तहत अदालत के समक्ष पेश की गई रिपोर्ट के साथ संलग्न नहीं किया। प्रार्थी ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसे ये दस्तावेज दिए जाए। इस मामले का निपटारा करते हुए न्यायाधीश
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विवेक सिंह ठाकुर ने अपने निर्णय में कहा कि हम स्वतंत्र भारत के नागरिक हैं और निष्पक्ष ट्रायल ही नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच भी हमारा मौलिक अधिकार है। न्यायाधीश ठाकुर ने कहा कि हम अंग्रेजों के जमाने में नहीं जी रहे हैं, जिसमें अभियोजन पक्ष अपनी सहूलियत के हिसाब से अदालत के समक्ष दस्तावेज पेश करे। जो दस्तावेज अभियोजन पक्ष के हित में हो उसे तो अदालत में पेश किया जाए और जो जांच के समय दोषी के पक्ष में मिले हों, उन्हें अदालत से छिपाया जाए।
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अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी से आशा की जाती है कि वह निष्पक्ष जांच करे और जांच से संबंधित सभी दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश करें। यदि जांच एजेंसी ऐसा नहीं करती तो उस स्थिति में अदालत जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली को सुधारने संबंधी आदेश पारित कर सकती है। न्यायाधीश ठाकुर ने प्रार्थी की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया।