वीरभद्र मामले में हाईकोर्ट ने ईडी, सीबीआई से मांगा जवाब
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हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) व सीबीआई को नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में दर्ज प्राथमिकी व उससे जुडे़ दस्तावेज हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को क्यों न प्रदान किए जाएं। न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार ने ईडी को अपना पक्ष 4 जनवरी तक रखने का निर्देश दिया है।
वीरभद्र ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें इस मुद्दे को लेकर दायर उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने कहा था कि दस्तावेज आरंभिक जांच से जुड़े हैं इसलिए आरोपी को नहीं दिए जा सकते। वीरभद्र सिंह की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उनका मुवक्किल दर्ज प्राथमिकी व उससे जुड़े सभी दस्तावेज पाने का हकदार है।
वीरभद्र के वकील सिब्बल की दलील
तय नियमों के तहत प्राथमिकी को प्राप्त करने के अलावा दस्तावेज भी उन्हें दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार ने गलत तरीके से उनके मुवक्किल को दस्तावेज न देने संबंधी ईडी के फैसले को उचित ठहराया है। उन्होंने कहा कि जो दस्तावेज गोपनीय है हम उसे नहीं बल्कि जांच से जुड़े दस्तावेज मांग रहे हैं।
सीबीआई ने वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी के खिलाफ आरंभिक जांच जून माह में आरंभ की थी। उन पर स्टील मंत्रालय में मंत्री होने के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। इसी के बाद ईडी ने भी मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने जांच के बाद 23 सितंबर को वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान व उनके सहयोगी चुन्नी लाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।