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हिमाचल: हाईकोर्ट ने कहा- अपनी पसंद से कम वेतन चुना तो जूनियर से ज्यादा सैलरी नहीं मांग सकता सीनियर

Fri, 30 Oct 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 30 Oct 2026 05:15 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की सैलरी उसके जूनियर (कनिष्ठ) से कम है, तो वह केवल इस आधार पर इसे वेतन विसंगति बताकर बराबरी की मांग नहीं कर सकता, बशर्ते यह अंतर उसकी ओर से खुद चुने गए गलत विकल्प के कारण आया हो। 

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High Court rules that if an employee chooses a lower salary of their own volition, they cannot claim a higher
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की सैलरी उसके जूनियर (कनिष्ठ) से कम है, तो वह केवल इस आधार पर इसे वेतन विसंगति बताकर बराबरी की मांग नहीं कर सकता, बशर्ते यह अंतर उसकी ओर से खुद चुने गए गलत विकल्प के कारण आया हो। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सिविल सर्विसेज (रिवाइज्ड पे) रूल्स, 2022 के नियम 9(2) के तहत यदि वेतन का अंतर अलग-अलग विकल्पों को चुनने के कारण आता है, तो सीनियर कर्मचारी स्टेप-अप (वेतन बढ़ोतरी) का हकदार नहीं होता। जूनियर को कोई एडवांस इंक्रीमेंट या एसीपी का अतिरिक्त लाभ नहीं मिला था। यह अंतर याचिकाकर्ता की ओर से स्वेच्छा से लिए गए निर्णयों का परिणाम है। अदालत ने याचिकाकर्ता सुभाष कुमार की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

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याचिकाकर्ता सुभाष कुमार और उनके जूनियर बाल किशन, दोनों चुनाव विभाग में पटवारी के रूप में वर्ष 1991 में नियुक्त हुए थे। इसके बाद दोनों को साथ ही कानूनगो (2010), नायब तहसीलदार (2016) और मार्च 2022 में तहसीलदार के पद पर पदोन्नत किया गया। याचिकाकर्ता की शिकायत थी कि दिसंबर 2025 की पे-डिटेल्स के अनुसार, उनका मूल वेतन 65,800 था, जबकि उनके जूनियर बाल किशन का वेतन 69,800 था। 4,000 के इस अंतर को दूर करने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने जूनियर के बराबर वेतन तय करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि 2010 में प्रमोशन के समय उन्हें वेतन निर्धारण का विकल्प नहीं दिया गया। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड से यह साबित हुआ कि दोनों को मौका मिला था।
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सुभाष कुमार ने प्रमोशन जॉइन करने की तारीख 15 जून 2010 से ही वेतन तय करने का विकल्प चुना, जबकि उनके जूनियर बाल किशन ने निचली पोस्ट (पटवारी) में अपनी अगली सालाना वेतन वृद्धि जुड़ने के बाद 1 जनवरी 2011 से वेतन तय करने का विकल्प चुना। इस वजह से जूनियर का वेतन 2011 से ही सीनियर से ज्यादा हो गया। जनवरी 2022 में जब नए पे-रूल्स लागू हुए, तो सुभाष कुमार ने 2.59 के फैक्टर से वेतन संशोधन का विकल्प चुना।वहीं उनके जूनियर बाल किशन ने 15 फीसदी वेतन वृद्धि वाले दूसरे नोटिफिकेशन का विकल्प चुना। अलग-अलग विकल्पों के कारण दोनों का वेतनमान अलग हो गया।याचिकाकर्ता 2011 से कम वेतन ले रहा था। उसने पहली बार 2019 में विभाग को प्रतिवेदन दिया, जिसे 2020 में खारिज कर दिया गया। इसके बाद कोर्ट आने में 6 साल और लगा दिए। इस अत्यधिक देरी के कारण भी यह मामला विचारणीय नहीं था।

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