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हजारों अवैध भवन मालिकों को कोर्ट ने दिया झटका, सरकार ने किया ये दावा
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 05 Apr 2017 10:54 AM IST
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हिमाचल में नौ हजार अवैध भवन मालिकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने इन आवेदकों के नक्शा पास करने का काम रोक दिया है। जब तक मामला हाईकोर्ट के विचाराधीन है, तब तक टीसीपी नक्शों की जांच पड़ताल नहीं करेगा।
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इधर, शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा है कि प्रदेश सरकार अपना पक्ष मजबूती से रखकर हाईकोर्ट को संतुष्ट कराएगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने 24 जनवरी 2017 को हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (संशोधन) अधिनियम 2016 अधिसूचित किया था।
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इस कानून के तहत आए आवेदनों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया जाना है। इसमें ‘जैसा है जहां है’ वाली नीति को अपनाते हुए नियमितीकरण करने की योजना है। ग्रीन और हेरिटेज क्षेत्रों में यह कानून लागू नहीं होगा।
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जो भवन इस कानून के तहत भी नियमितीकरण के लिए पात्र नहीं होंगे, उनके बिजली-पानी कनेक्शन काटने और भवनों को गिराने का प्रावधान भी किया गया है। नियमितीकरण फीस भी 400 से 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है।
लाखों रुपये कमा गए निजी प्लानर और इंजीनियर
अवैध भवनों का नक्शा तैयार करने में जहां निजी प्लानरों की मौज रही, वहीं इंजीनियरों ने भी स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी प्रमाण पत्र जारी कर लाखों रुपये कमाए। 60 दिन तक इन प्लानरों और इंजीनियरों के दफ्तरों में अवैध भवन मालिकों का हुजूम उमड़ा रहा।
कई निजी प्लानरों ने 25 से 30 हजार रुपये नक्शा तैयार करने के लिए जबकि अधिकांश इंजीनियरों ने 15 से 20 हजार रुपये लेकर अवैध भवन मालिकों को स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी प्रमाण पत्र जारी किए।