हाईकोर्ट: कोरोना संक्रमण रोकने के लिए जिला निगरानी समिति बनाने के आदेश
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने कहा कि प्रत्येक जिले से कोरोना से संबंधित मुद्दे एक दूसरे से भिन्न हैं। इसलिए पूरे राज्य के लिए एक से दिशा-निर्देश जारी करना तर्कसंगत नहीं होगा।
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कोरोना संक्रमण के चलते चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रत्येक जिले के लिए एक जिला निगरानी समिति का गठन करने के आदेश दिए हैं। इन समितियों में प्रत्येक जिले के उपायुक्त, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव और जिला मुख्यालय पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शामिल किए जाएं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने कहा कि प्रत्येक जिले से कोरोना से संबंधित मुद्दे एक दूसरे से भिन्न हैं। इसलिए पूरे राज्य के लिए एक से दिशा-निर्देश जारी करना तर्कसंगत नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय निगरानी समितियां अधिक उपयोगी साबित होंगी। यदि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक हैं और समिति में भाग लेने के इच्छुक नहीं हैं तो वह अपनी ओर से किसी व्यक्ति को नामित भी कर सकते हैं।
संबंधित उपायुक्त समिति के अध्यक्ष होंगे। समितियां कोरोना के संबंध में संक्रमण की स्थिति का पता लगाने के लिए अपने अपने जिले के कस्बों, शहरों और गांवों का दौरा करेंगी और पता लगाएगी कि सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता कोरोना से निपटने में पेश आ रही चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। यह समितियां संभावित तीसरी लहर से निपटने की तैयारी के लिए उठाए जाने वाले कदम भी बताएंगी। समितियां प्रत्येक सप्ताह के मंगलवार या उससे पहले ईमेल से हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को साप्ताहिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। हाईकोर्ट की खंडपीठ 14 जुलाई को दोपहर 2 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इन समितियों के साथ बातचीत भी करेंगी। कोर्ट ने सभी समितियों को आदेश दिए हैं कि वह पहली बैठक 10 जुलाई को शाम 5 बजे आयोजित करें। कोर्ट ने इस जनहित मामले की सुनवाई प्रत्येक बुधवार को करने के आदेश भी जारी किए।