फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   High Court: Government should make a policy to include trained guerrillas in the armed forces

हाईकोर्ट: प्रशिक्षित गुरिल्लाओं को सशस्त्र बल में शामिल करने के लिए नीति बनाए सरकार

Fri, 17 Dec 2021 09:22 PM IST
Krishan Singh विधि संवाददाता, मंडी
विधि संवाददाता, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Fri, 17 Dec 2021 09:22 PM IST
सार

उच्च न्यायालय ने गुरिल्ला संगठन के विशेष प्रशिक्षण को देखते हुए उन्हें समयबद्ध तरीके से 90 दिनों के भीतर इन बलों में शामिल करने के लिए स्कीम तैयार करने के लिए कहा है। प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अजय मोहन गोयल  बेरोजगार गुरिल्ला संगठन की याचिका पर उक्त आदेश जारी किए हैं। 

विज्ञापन
High Court: Government should make a policy to include trained guerrillas in the armed forces
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एसएसबी प्रशिक्षित गुरिल्ला संगठन की याचिका पर फैसला सुनाते हुए केंद्र और राज्य सरकार को उन्हें एसएसबी, सशस्त्र बलों और पैरा मिलिट्री फोर्स में शामिल करने की स्कीम बनाने पर अंतिम निर्णय लेने के आदेश दिए हैं। उच्च न्यायालय ने गुरिल्ला संगठन के विशेष प्रशिक्षण को देखते हुए उन्हें समयबद्ध तरीके से 90 दिनों के भीतर इन बलों में शामिल करने के लिए स्कीम तैयार करने के लिए कहा है। प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अजय मोहन गोयल  बेरोजगार गुरिल्ला संगठन की याचिका पर उक्त आदेश जारी किए हैं। 

विज्ञापन


उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि 25 सितंबर 2008 के फैसले में निर्देशात्मक आदेश जारी किए थे। ऐसे में उच्च न्यायालय ने केंद्र और प्रदेश सरकार को आदेश जारी किए हैं कि वह बेरोजगार गुरिल्ला संगठन को प्रशिक्षण के आधार पर एसएसबी, सशस्त्र बलों और पैरा मिलिट्री फोर्स में शामिल करने के मुद्दे पर अंतिम निर्णय ले सकती है। इधर, संगठन के प्रदेशाध्यक्ष एमआर भारद्वाज ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले से प्रदेश के हजारों प्रशिक्षित बेरोजगार गुरिल्लाओं में खुशी की लहर दौड़ गई है। 
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने 90 दिनों के भीतर न्यायालय के आदेश की मानना नहीं की तो संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने बताया कि साल 1962 में एसएसबी का गठन किया गया था जिसे सीमावर्ती राज्यों के नौजवानों को गुरिल्ला प्रशिक्षण का जिम्मा सौंपा गया था। उन्होंने बताया कि गुरिल्ला संगठन ने प्रशिक्षित बेरोजगार गुरिल्लाओं को अन्य बलों में शामिल करने की मांग को लेकर लंबा संघर्ष सड़कों और न्यायालय में लड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्वीकार करने से पहले ही मिल सकती है त्यागपत्र वापस लेने की अनुमित: हाईकोर्ट
 प्रदेश उच्च न्यायालय ने त्यागपत्र से जुड़े मामले में स्पष्ट किया है कि त्याग पत्र वापस लेने की अनुमति केवल त्याग पत्र स्वीकार करने से पूर्व ही ली जा सकती है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने कहा कि अगर प्रार्थी ने त्यागपत्र को वापस लेना ही था तो उसे तुरंत व्यक्तिगत तौर पर प्रतिवादी से मिलकर अपने त्यागपत्र को वापस लेने की प्रार्थना करनी चाहिए थी।  प्रार्थी 18 मई 2017 को आंगनबाड़ी वर्कर ट्रेनिंग सेंटर वुमन हॉस्टल मंडी में चौकीदार के पद पर नियुक्त हुआ था। उसने 3 अगस्त 2017 को सेवा से त्यागपत्र दे दिया था। जिसे हिमाचल प्रदेश राज्य बाल कल्याण परिषद ने 9 अगस्त 2017 को स्वीकार कर लिया था। हालांकि प्रार्थी ने 7 अगस्त 2017 को अपना त्यागपत्र वापस लेने के लिए आवेदन भेजा था। मगर यह प्रतिवादी कार्यालय में 10 अगस्त 2017 को पहुंचा। न्यायालय ने इन तथ्यों के दृष्टिगत प्रार्थी की याचिका को खारिज कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed