शिमला: हाईकोर्ट ने खारिज की नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी की अपील
सत्र न्यायाधीश किन्नौर ने दोषी को सात वर्ष की कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। जिला एवं सत्र न्यायालय किन्नौर के इस निर्णय को शिव चंद ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने दोषी की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी है।
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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर निवासी आरोपी शिव चंद को नाबालिग से दुष्कर्म करने के आरोप में दोषी ठहराए जाने के फैसले को हाईकोर्ट ने सही ठहराया है। सत्र न्यायाधीश किन्नौर ने दोषी को सात वर्ष की कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। जिला एवं सत्र न्यायालय किन्नौर के इस निर्णय को शिव चंद ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने दोषी की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी है। इस मामले के अनुसार शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी पुराने घर में पशुओं को चारा डालने गई थी, लेकिन वह वापस नहीं आई। दूसरे दिन दोषी ने शिकायतकर्ता को फोन पर बताया कि उसने पीड़िता के साथ शादी कर ली है।
नाबालिग के पिता की शिकायत पर पुलिस थाना निरमंड, जिला कुल्लू में दोषी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ निचली अदालत में अभियोग चलाया। निचली अदालत ने दस गवाहों के बयानों के आधार पर दोषी को सात वर्ष की कठोर कारावास और दस हजार रुपये बतौर जुर्माने की सजा सुनाई गई। हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़े सारे रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया है कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित करने में सफल रहा है। जिला एवं सत्र न्यायालय किन्नौर की ओर से दोषी को सुनाई गई सजा अभियोग में जुटाए गए सबूतों पर आधारित है।