भारत में इस कुत्ते से हुई थी डॉग स्क्वायड की शुरुआत, नाम था 'हीरो'
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आजादी के बाद देश के बड़े हिस्से में जब लोग कुत्ते पालना भी नहीं जानते थे, उस दौर में हिमाचल में पहला खोजी कुत्तों का दस्ता तैयार हो गया था। आयरलैंड से उस समय लाखों रुपये खर्च कर लाए गए हीरो नाम के विदेशी नस्ल के कुत्ते ने अपनी उपयोगिता साबित कर देश में खोजी कुत्तों को पालने की परंपरा को बढ़ावा दिया।
आज देश की सुरक्षा में ये खोजी कुत्तों के दस्ते महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हिमाचल में सात दशक पहले ही चोरों को पकड़ने से लेकर हत्यारों की पड़ताल तक में इन खोजी कुत्तों की मदद ली जाने लगी थी। यहां 1957 में आयरलैंड से एक जर्मन शेफर्ड नस्ल का कुत्ता लाकर खोजी कुत्तों के दस्ते की परंपरा शुरू हुई थी।
250 यूरो में खरीदा गया था पहला कुत्ता
इन कुत्तों की वफादारी और उपयोगिता साबित होने पर देश के अन्य राज्यों ने भी खोजी कुत्तों के दस्ते तैयार कर लिए। वर्तमान में नक्सल प्रभावित इलाकों से बॉर्डर पर बम, नारकोटिक्स, एक्सप्लोसिव ढूंढने के लिए खोजी कुत्तों के दस्ते का इस्तेमाल हो रहा है।
हिमाचल प्रदेश पुलिस गार्जियंस ऑफ द हिल्स नाम की किताब में यह दावा किया गया है। उत्तर प्रदेश निवासी और इस किताब को लिखने वाले हिमाचल कैडर के आईपीएस जहूर हैदर जैदी बताते हैं कि हिमाचल में 1957 में डाग स्क्वायड की स्थापना के लिए तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर राजा बजरंग बहादुर सिंह भद्री ने ही निर्देश दिए थे।
इसके बाद उस समय आयरलैंड से 250 यूरो में एक जर्मन शेफर्ड नस्ल के कुत्ते के साथ यह डाग स्क्वायड शुरू हुआ। इसका नाम हीरो था। जैदी बताते हैं कि एक कुत्ते से शुरू हुई खोजी दस्ते के गठन के पांच साल में इनकी संख्या बढ़कर चौदह हो गई।
उपयोगिता देख दूसरे प्रदेशों ने शुरू किया गठन
कुत्तों की सूंघने की क्षमता जबरदस्त होती है। तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर को यह बात अच्छे से पता थी। यही कारण था कि उन्होंने इन डॉग स्क्वायड के गठन और इस्तेमाल पर लगातार जोर दिया। चोरी, हत्या और लूटपाट जैसे मामलों की जांच में हिमाचल डॉग स्क्वायड के खोजी कुत्ते लगातार अपनी उपयोगिता साबित कर रहे थे।
सुरक्षा के साथ देश-विदेश में होने वाले डॉग शो में भी ये हिमाचल का नाम रोशन कर रहे थे। जब इनके चर्चे आम हुए तो दूसरे प्रदेशों ने भी हिमाचल की तर्ज पर डॉग स्क्वायड गठित करने शुरू कर दिए। कई प्रदेशों के डॉग स्क्वायड बनाने में भी हिमाचल के ट्रेनर्स की मदद ली गई।