सीबीआई खोल सकती है दुर्लभ घंटे की चोरी का रहस्य
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब शायद भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के परिसर से 30 किलो के भारी भरकम ऐतिहासिक घंटे की चोरी का राज खुले। 21 अप्रैल 2010 की रात जब ये घंटा चोरी हुआ था तब सात सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर थे। घंटा मुख्यद्वार से कुछ कदम दूर रिसेप्शन के सामने बरामदे में लगा था। घंटे तक पहुंचने के लिए चोरों ने एक दरवाजा पार किया।
यह घंटा छत में लकड़ी की चौखट में लगा रखा था। चोर लकड़ी की चौखट समेत घंटा उखाड़ ले गए। पुलिस का अनुमान था कि इस चौखट का वजन 50 किलो से अधिक रहा होगा। सुरक्षा के लिहाज से संस्थान परिसर में पूरी रात बिजली की व्यवस्था रहती है और कर्मचारी गश्त करते हैं। परिसर में चारों ओर कृत्रिम रोशनी है लेकिन सिक्योरिटी गार्ड उसमें भी चोरों को नहीं देख पाए।
संस्थान ने की सीबीआई जांच की मांग
अब घंटा चोरी के मामले में इस संस्थान प्रशासन ने अब सीबीआई जांच की मांग करते हुए प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है। इस पर हिमाचल हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रधान सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक , पुलिस अधीक्षक शिमला और एसएसओ बालूगंज को नोटिस जारी कर उनसे एक सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।
याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार वर्ष 1903 में 30 किलो की दुर्लभ धातु से बना घंटा नेपाल के राजा ने तत्कालीन वायसरॉय को भेंट किया था। लकड़ी की फ्रेम से जड़ा यह घंटा संस्थान के मुख्य द्वार पर लटकाया गया था। 21 अप्रैल 2010 की रात को यह घंटा चोरी हो गया था। इस बारे में पुलिस थाना बालूगंज में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
चोरी का सुराग लगाने में नाकाम रही पुलिस ने सात दिसंबर 2013 को न्यायिक दंडाधिकारी शिमला की अदालत में मामला बंद करने के लिए आवेदन किया, जिसका संस्थान ने विरोध किया। पुन: जांच करवाने के बारे में भी गुहार लगाई गई। न्यायिक दंडाधिकारी शिमला ने इस मामले में दोबारा जांच करने के आदेश दिए हैं। पुलिस की जांच से असंतुष्ट संस्थान ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि इस मामले की जांच की जिम्मेवारी सीबीआई को सौंपी जाए।
जांच संदेह के घेरे में
एडवांस स्टडी से ऐतिहासिक भारी भरकम घंटे के चोरी मामले को सुलझाने के लिए कई आईपीएस अफसरों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी लेकिन कोई भी कामयाब नहीं हो पाया। इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए कई शातिरों की गर्दनों तक पुलिस के हाथ पहुंचे।
लेकिन कोई खास सुराग उगलवा पाने में असमर्थ रहे। इतना ही नहीं, जांच के बीच में ही आईपीएस अफसर या तो डेपुटेशन पर केंद्र में चले गए या फिर उनका जिला शिमला पुलिस से कहीं दूसरी जगह तबादला किया गया। इस मामले की जांच कई हाथों से गुजरी।
जब कोई सुराग हाथ नहीं लगा तो पुलिस प्रशासन ने मामला बंद करने की अपील की लेकिन एडवांस स्टडी प्रबंधन ने इसका विरोध किया। अब मामला प्रदेश उच्च न्यायालय में है। इस बहुचर्चित मामले पर हाईकोर्ट के फैसले पर सभी की निगाह टिकी है।
उठे थे सवाल
कड़ी सुरक्षा के बीच एक ऐतिहासिक धरोहर का चोरी होना किसी के गले से नहीं उतरा। उच्च अध्ययन संस्थान में कई ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं। इनकी सुरक्षा के लिए वारदात के समय 17 गार्ड तैनात थे। चोरी वाली रात चौकीदार समेत सात कर्मचारियों की नाइट ड्यूटी थी। इनमें से एक चौकीदार नदारद था।
आखिर क्या खास था इस घंटे में?
इस तरह का घंटा बहुमूल्य होता है। ऐसा दावा किया जाता है कि इंटरनेशनल मार्केट में इसकी मुंहमांगी कीमत दी जाती है। इस घंटे के चोरी होने की मुख्य वजह यह माना जा रहा है कि चोरों को लगा कि अष्टधातु के साथ साथ यह घंटा राइस पुलिंग है।
राइस पुलिंग ऐसी धातु होती है जो चावल को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसी वजह से यह गायब की गई। हालांकि इस बात का पुलिस ने जांच अंदेशा जताया था लेकिन इस मामले में किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होने की वजह से रहस्य बरकरार है।