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Himachal: जख्मों पर संक्रमण नहीं होने देंगी हल्दी-नीम से बनीं हर्बल पट्टियां

Tue, 11 Oct 2022 10:46 AM IST
Krishan Singh त्रिपुरारी सांख्यान, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
त्रिपुरारी सांख्यान, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Tue, 11 Oct 2022 10:46 AM IST
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सार
हिमाचल प्रदेश की जड़ी-बूटियों से आईआईटी दिल्ली ने हर्बल उत्पाद तैयार किए हैं। जल्द ही इन्हें बाजार में उतारने की तैयारी है।
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Herbal strips made of turmeric neem will not allow infection on wounds
हल्दी-नीम से बनीं हर्बल पट्टियां - फोटो : संवाद

विस्तार

नीम, हल्दी, एलोवेरा सहित कई जड़ी-बूटियों से निर्मित हर्बल पट्टियां अब जख्मों पर संक्रमण नहीं होने देंगी। हिमाचल प्रदेश की जड़ी-बूटियों से आईआईटी दिल्ली ने हर्बल उत्पाद तैयार किए हैं। जल्द ही इन्हें बाजार में उतारने की तैयारी है। खास बात यह है कि एक हर्बल पट्टी की कीमत महज दो से तीन रुपये होगी।  वैज्ञानिकों ने हर्बल पट्टियां, हर्बल स्टीचिज (टांके) के अलावा ड्रेसिंग में प्रयोग होने वाली सभी प्रकार के उत्पाद तैयार किए हैं। हर्बल पट्टियों की बात की जाए तो ये विभिन्न प्रकार की हैं। हल्दी से बनाई गई पट्टी पीले रंग की है जो विभिन्न आकारों में बनाई गई है। इसे जख्म के अनुसार लगाया जा सकता है। यह गोल, आयताकार, वर्गाकार और अंडे के आकार जैसी भी हैं।



नीम से निर्मित पट्टी हरी है जबकि एलोवेरा से बनी पट्टियां सफेद रंग की हैं। मंडी के सरदार पटेल विश्वविद्यालय में चल रहे अंतरराष्ट्रीय साइंस सेमिनार के दौरान इन उत्पादों की प्रस्तुति आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक प्रो. भुवनेश गुप्ता ने दी। इसमें उनके ग्रुप की सदस्य हिमाचल निवासी डॉ. चेतना ने भी मदद की। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में इन उत्पादों को बहुत ही आसानी से तैयार किया जा सकता है। उनका ग्रुप इस प्रोजेक्ट में लगातार काम कर रहा है। उल्लेखनीय है कि हर्बल उत्पाद गुणवत्ता के साथ ही हर तबके के लोगों की पहुंच में हैं। इनको बहुत ही कम लागत में तैयार किया जा सकता है। इनकी कीमत बहुत कम है। प्रदेश में इन उत्पादों को बनाने के लिए कंपनियों को भी प्रेरित किया जा रहा है। 

इस तरह बनाई जा सकती है हर्बल पट्टी
हर्बल पट्टी को बनाना बहुत ही सरल है। इसके लिए वायोपालिमर में एलोवेरा, हल्दी या नीम डाले जाते हैं। इसके बाद इसको मुलायम बनाने के लिए ग्लीसरीन या ऐसी ही कोई चीज डाली जाती है। बाद में कॉटन के कपड़े पर कोट कर देते हैं। इस तरह से हर्बल ड्रेसिंग तैयार कर सकते हैं। 

रोजगार का साधन
प्रदेश में ड्रेसिंग के लिए हर्बल पट्टियां बनाना बहुत ही सरल और फायदेमंद है। इसके लिए प्रदेश में प्रचुर मात्रा में हल्दी, नीम, एलोवेरा और अन्य जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं। युुवा इस पर काम कर सकते हैं और इसे रोजगार का साधन भी बना सकते हैं। सबसे खास बात यह कि इन उत्पादों को बहुत कम लागत में तैयार किया जा सकता है।

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