पर्यटन स्थलों के लिए शुरू होगी हेली टैक्सी सेवा : सीएम
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हिमाचल के पर्यटन स्थलों के लिए हेली टैक्सी सेवा शुरू होगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि चार जून से शिमला-चंडीगढ़ हेली टैक्सी सेवा शुरू होने के बाद प्रदेश के पर्यटन स्थलों का सर्वे कर अन्य दार्शनिक स्थलों के लिए हेली टैक्सी सेवा शुरू की जाएगी।
मंडी जिला की आराध्य देवी शिकारी देवी को भी हेली टैक्सी से जोड़ा जाएगा। सीएम बुधवार को अपने विधानसभा क्षेत्र जंजैहली में जिला स्तरीय कुथाह मेले के समापन पर जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पर्यटन कारोबार बढ़ाना उनका लक्ष्य है ताकि गांवों का विकास हो सके और बेरोजगार युवा स्वावलंबी बनें। विकास के साथ सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई भी जारी रहेगी। सीएम ने कहा कि शिखर पर हिमाचल आधार पर सरकार विकास कर रही है।
आजादी के 70 वर्ष बीत जाने के बाद मंडी जिला को मिली सीएम की कुर्सी
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देवभूमि हिमाचल से गहरा प्यार है। पीएम मोदी ने मेरे सीएम बनने से पहले मेरे नाम पर शपथ ग्रहण समारोह का मुहूर्त निकालकर तिथि भी तय कर दी थी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में गरीब के बेटे को राज्य की जिम्मेदारी सौंपना मोदी का सपना था। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच भाजपा में है और किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं। आजादी के 70 वर्ष बीत जाने के बाद मंडी जिला को सीएम की कुर्सी मिली है।
यह एक इतिहास बन गया है। उन्होंने कहा है कि आने वाले लोकसभा चुनावों में मोदी को पुन: प्रधानमंत्री बनाने के लिए हिमाचल भाजपा चारों सीटें जीतकर उनकी झोली में डालेगी।
सीएम करवाएंगे आईआईटी मंडी में धांधली के आरोपों की जांच
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि आईआईटी मंडी में कर्मचारी और प्रबंधक के आरोपों की जांच करवाई जाएगी। आईआईटी केंद्र सरकार के अधीन आती है। गोलमाल को प्रदेश के हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यदि संस्थान में कुछ गलत हो रहा है तो वे जांच के लिए एमएचआरडी को लिखेंगे। मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा। यह मामला उनके ध्यान में है। सीएम ने सराज दौरे के दौरान यह बात कही।
गत दिनों आईआईटी के एक कर्मचारी सुजीत स्वामी और प्रबंधक रिटायर्ड कर्नल देवांग नायक ने भर्ती, प्रमोशन, एडमिशन, ठेकों के आवंटन को लेकर आरोप लगाए थे।
मामले में सांसद रामस्वरूप शर्मा भी आईआईटी प्रबंधन पर सवाल उठा चुके हैं। उन्हें आईआईटी के प्रबंधक ने धांधली के तथ्य सौंपे थे। इसके बाद सांसद ने मीडिया के सामने इस मामले को कोर्ट तक ले जाने की बात कही थी।
गलत आंकड़ों से धांधली के आरोप
भर्ती, प्रमोशन, एडमिशन और ठेकों में आवंटन से लेकर नेशनल रैकिंग फ्रेमवर्क रिपोर्ट तक में गलत जानकारी देने के संस्थान प्रबंधन पर आरोप लगे हैं। ये आरोप संस्थान के कर्मचारी और प्रबंधक ने आरटीआई से जुटाई जानकारियों के आधार पर लगाए हैं।
इसमें मनमर्जी से बेहद कम समय में 200 फीसदी से अधिक इंक्रीमेंट देना और नेशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क रिपोर्ट (एनआईआरएफ) में गलत जानकारी देना तक शामिल है।
एनआईआरएफ रिपोर्ट संस्थान की रैंकिंग में अहम रोल निभाती है। यह रिपोर्ट संस्थान की रैकिंग को तय करती है। इसमें आंकड़ों हुए गोलमाल को दर्शा कर धांधली के आरोप लगाए गए थे।