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Himachal Weather: बारिश ने बरपाया कहर, 20 लोगों की मौत, छह लापता, रेलवे पुल ढहा, मणिमहेश यात्रा रोकी

Sat, 20 Aug 2022 10:36 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, मंडी/कांगड़ा/चंबा/शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, मंडी/कांगड़ा/चंबा/शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 20 Aug 2022 10:36 PM IST
सार

 मंडी, चंबा और कांगड़ा जिला में 20 लोगों की मौत हो गई है, जबकि छह लापता हैं। मंडी में एक ही परिवार के आठ लोगों समेत 13, चंबा में तीन, शिमला के ठियोग और कांगड़ा जिला में दो-दो लोगों की मौत हुई है। 

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Heavy Rain wreaks havoc in Himachal, 20 killed, Chakki railway bridge collapsed, Manimahesh Yatra stopped
हिमाचल में भारी बारिश से तबाही। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऑरेंज अलर्ट के बीच शुक्रवार रात से जारी भारी बारिश ने हिमाचल प्रदेश में कहर बरपा दिया। मंडी, चंबा और कांगड़ा जिला में 20 लोगों की मौत हो गई है, जबकि छह लापता हैं। मंडी में एक ही परिवार के आठ लोगों समेत 13, चंबा में तीन, शिमला के ठियोग और कांगड़ा जिला में दो-दो लोगों की मौत हुई है। कांगड़ा में अंग्रेजों के जमाने का बना चक्की खड्ड पर रेलवे का पुल ढह गया है। इसके छह पिल्लर ढह गए हैं। बीते 17 जुलाई से ही इस ट्रैक पर पठानकोट से जोगिंद्रनगर तक सभी ट्रेनों की आवाजाही बंद है। खराब मौसम के चलते मणिमहेश यात्रा दो दिन के लिए स्थगित कर दी है। भरमौर-हड़सर मार्ग अभी अवरुद्ध है। प्रदेश में शनिवार शाम तक 268 सड़कें, 500 बिजली ट्रांसफार्मर और 140 पेयजल योजनाएं ठप रहीं। 79 मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। 

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धर्मशाला में 64 साल बाद रिकॉर्ड 333 मिलीमीटर बारिश
शुक्रवार रात कांगड़ा में सबसे अधिक 346 और धर्मशाला में 64 साल बाद रिकॉर्ड 333 मिलीमीटर बारिश हुई। रविवार और सोमवार को भी मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। मंडी के जवालापुर में चलती बाइक पर पत्थर गिरने से दो युवाओं की मौत हो गई है। जिले के नाचन क्षेत्र की पंचायत काशन के गांव झड़ोंन में शुक्रवार रात पहाड़ी के मलबे में मकान के दबने से एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत हो गई है। घटना रात करीब 2:00 बजे की बताई जा रही है। 
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इनकी गई जान
मृतकों में काशन पंचायत प्रधान खेम सिंह (35) पुत्र रूप चंद, प्रधान की पत्नी मीरा देवी (34), उनके दो बेटे भास्कर (14), तेजेंद्र (11), प्रधान की भाभी कमला देवी (32) पत्नी झाबे राम, इनकी बेटी रोहिणी (6) और बेटा दिव्यांशु (7) और प्रधान के ससुर डागु राम (55) निवासी काढ़ि खड़ूहल तहसील थुनाग शामिल हैं। प्रधान खेम सिंह के चाचा रमेश को जोर का धमाका सुनाई देने पर घटना का पता चला। रमेश ने ग्रामीणों को सूचित किया और बचाव कार्य रात 3:00 बजे से शनिवार दोपहर 2:00 बजे तक करीब 11 घंटे चला। वहीं, मंडी के ही द्रंग विधानसभा क्षेत्र में बादल फटने से ओल्ड कटौला के संदोआ में सतार अली, उनके दो बेटे छाईया, साजिद, दो बेटियां साजिदा, सुहाना और तौफीक अख्तर पुत्र बरकत अली देर रात बाढ़ में बह गए, जिनमें दो शव बरामद हो गए हैं। एक व्यक्ति हणोगी में लापता है। एनडीआरएफ के 30 जवान और पुलिस दल ने लापता लोगों की तलाश में रेस्क्यू अभियान चलाया है।

बादल फटने से करीब 60 दुकानें, 31 मकान क्षतिग्रस्त
 मंडी के ही सराज के केउली में एक घर के भूस्खलन की चपेट में आने से महिला पुष्पा देवी की मौत हो गई। थुनाग बाजार में बादल फटने से करीब 60 दुकानें, 31 मकान, 26 गोशालाएं, एक पुल क्षतिग्रस्त हो गया। दर्जनों वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मंडी में खेल स्पर्धा के लिए नेरचौक में ठहराईं 40 छात्राओं को रेस्क्यू किया गया। अधर, सोलन-सैंज-रोहडू़ मार्ग पर बल्ग के समीप रोहडू़ की ओर जा रही कार पर चट्टानें गिरने से दो लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो अन्यों को गंभीर चोटें आई हैं। मृतकों की पहचान उमेश चंद भाटी पुत्र स्व. हर सरन सिंह निवासी गांव शिलारपुर सेक्टर-101 नोएडा, उत्तर प्रदेश और पिंकू पुत्र जगत सिंह निवासी गांव कणोली गाजियाबाद के रूप में हुई है। वहीं चौपाल के चंजाल पुल गांव में मकान गिरने से छह लोग घायल हो गए। चंबा में भूस्खलन से आए मलबे में दबने से घर में सो रहे पति-पत्नी और बेटे की मौत हो गई। चमारू राम (42) पुत्र धर्मो राम, मीना देवी (38) पत्नी चमारू राम और उनके 11 वर्षीय बेटे अजय कुमार के शव मलबे से निकाले गए। 

कांगड़ा में नौ वर्षीय बच्चे की मौत
जिला कांगड़ा के शाहपुर की ग्राम पंचायत गोरड़ा के वार्ड-छह में स्लेटपोश मकान की चपेट में आने से नौ वर्षीय बच्चे आयुष पुत्र नसीब सिंह की मौत हो गई है। वहीं, उपमंडल धीरा की ग्राम पंचायत कुहाणा में रह रहे एक प्रवासी मजदूर बालमुकुंद की डंगे में दबने से जान चली गई। मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और चंबा जिला के स्कूलों में प्रशासन ने शनिवार को छुट्टी दे दी थी। जिला मंडी में तीन नेशनल हाईवे बंद होने से सैकड़ों यात्री देर रात से गाड़ियों में ही भूखे-प्यासे फंसे रहे। कोटीरोपी में भारी भूस्खलन से गांव को खाली कराया गया है। डलहौजी-पठानकोट नेशनल हाईवे पर चंबा के पंजपुला में जमीन धंसने से बस डंगे में अटक गई। इसमें 35 लोग सवार थे। पठानकोट-मंडी, मंडी-कुल्लू और मंडी-जालंधर वाया धर्मपुर एनएच ठप हो गए हैं। 

सीएम ने दिए बचाव कार्यों के निर्देश, नड्डा ने दुख जताया
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बारिश से हुए जान-माल के भारी नुकसान पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सभी जिला उपायुक्तों और संबंधित अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत, बचाव और पुनर्वास कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने मृतकों के परिवारों के प्रति दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह नुकसान अपूरणीय है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेब उत्पादक क्षेत्रों और अस्पतालों की ओर जाने वाली प्रमुख सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए फिसलन वाले स्थानों और नदी तटों से दूर रहने का परामर्श दिया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए अतिरिक्त केंद्रीय दल भेजने का अनुरोध किया जाएगा।

जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य में अब तक पिछले 24 घंटों के दौरान 20 मौतें हुई हैं। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को प्रभावी बचाव कार्यों के लिए उचित समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए। उन्होंने उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों में आवश्यकतानुसार स्कूल बंद करने के संबंध में निर्णय लेने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने सिरमौर जिले के सराहां से विभिन्न जिलों के उपायुक्तों के साथ प्रदेश में भारी बारिश के कारण उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्हें तत्काल राहत और बचाव अभियान सुनिश्चित करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण स्थानों पर पर्याप्त संख्या में बचाव दल और मशीनरी तैनात करने के निर्देश दिए।

अवैध खनन की भेंट चढ़ गया चक्की खड्ड में बना रेल पुल

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चक्की रेलवे पुल बहा - फोटो : संवाद

लंबे समय से अवैध खनन का शिकार हो रहा चक्की खड्ड में बना रेल पुल आखिरकार शनिवार को बाढ़ में बह ही गया। पुल के पिलरों के आसपास प्रशासनिक लापरवाही के चलते बेधड़क अवैध खनन का खेल जारी था। शनिवार को पुल के छह पिलर पूरी तरह बह गए, जबकि अन्य छह भी खतरे की जद में आ गए हैं। खनन के कारण पुल की नींव कमजोर हो गई थी। वहीं, नौ दशकों में इस नैरोगेज रेलमार्ग के विकास व विस्तार को लेकर रेल मंत्रालय ने भी कोई जहमत नहीं उठाई। अब पुल बह जाने से हजारों नौकरीपेशा लोगों, स्कूली बच्चों और बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इस रेलमार्ग के बहाल होने के लिए अब लंबा इंतजार करना पड़ेगा। प्रदेश की प्रमुख धरोहरों में से एक पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का सपना पिछले कई सालों से नेता दिखा रहे हैं।

लेकिन कांगड़ा घाटी की जीवनरेखा समझी जाने वाली इस रेल को अभी तक की सरकारें न तो आगे खींच पाईं और न ही इसकी गति व पटरी का आकार बदल सकी हैं। ब्रिटिश कालीन रेलमार्ग को नैरोगेज से ब्रॉडगेज करने का मुद्दा कई बार केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाता रहा है। लेकिन किसी ने कोई सुध नहीं ली।डिविजनल मंडल फिरोजपुर रेलवे प्रबंधक डॉ. सीमा शर्मा ने बताया कि पुल के बाढ़ में बहने के कारणों की जांच की जाएगी। यह पुल बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका था। इंजीनियरों से बात करके बरसात खत्म होते ही दोबारा इसके निर्माण का कार्य आरंभ किया जाएगा। उसके बाद बंद पड़ीं ट्रेनों को बहाल किया जाएगा।

1929 में बना था पुल
वर्ष 1929 में ब्रिटिश शासनकाल में जोगिंद्रनगर में स्थापित किए गए शानन विद्युत प्रोजेक्ट के लिए कांगड़ा वैली रेलवे लाइन को बिछाया गया था। इसे बाद में जनता के लिए खोल दिया गया। 164 किलोमीटर लंबे इस रेलमार्ग में 33 छोटे-बड़े स्टेशन आते हैं। यह रेल 939 पुलों, दो सुरंगों व 484 मोड़ों से होकर गुजरती है। 

विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने की कवायद को भी लगा धक्का
1926 में पुल को बनाने का कार्य शुरू हुआ था। वहीं, 1929 में पुल तैयार हो गया था। इसके बाद यह पुल लगातार सेवाएं देता आया है। अब इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की कवायद को भी धक्का लगा है। 

 

भारी बारिश से सेब सीजन प्रभावित

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हिमाचल में अचानक बाढ़ आने का खतरा। - फोटो : संवाद

भारी बारिश से सेब सीजन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शिमला जिले के सेब उत्पादक क्षेत्रों में संपर्क सड़कें बंद होने के बाद बागवानों ने तुड़ान रोक दिया है। इससे मंडियों में सेब की आमद घट गई है। जिन बगीचों में फसल तैयार है, वहां अधिक दिन तक तुड़ान नहीं रोका जा सकता है। ऐसे में बागवानों को फसल मंडियों तक पहुंचाने की चिंता सता रही है। ठियोग, कोटखाई, चौपाल, नारकंडा, खड़ापत्थर सहित अन्य इलाकों के संपर्क मार्ग बंद होने से बागवानों की परेशानी बढ़ गई है।

बगीचों में मलबा आने से सेब से लदे पेड़ गिरने के कारण बागवानों को भारी नुकसान भी हुआ है। शुक्रवार के मुकाबले शनिवार को शिमला की भट्ठाकुफर फल मंडी में सेब की करीब 5,000 जबकि ठियोग की पराला मंडी में 4,000 कम पेटियां पहुंचीं। भट्ठाकुफर फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अमन सूद और पराला फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश ठाकुर ने बताया कि भारी बारिश के बाद सड़कें बंद होने से मंडियों में सेब की आमद में गिरावट आई है। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने प्रदेश सरकार से भारी बारिश से बंद हुईं सड़कों को तुरंत बहाल करने और नुकसान का आंकलन कर बागवानों को मुआवजा देने की मांग की है।

पौंग बांध का जलस्तर खतरे के निशान से महज 15 फीट दूर

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चक्की रेलवे पुल बहा। - फोटो : संवाद

लगातार हो रही बारिश के कारण पौंग बांध के जल स्तर में सिर्फ शनिवार के ही दिन पांच फीट की बड़ी बढ़ोतरी हुई है। झील में बढ़े जलस्तर के कारण आसपास रह रहे लोगों में खौफ बढ़ता जा रहा है। इस खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन और बीबीएमबी अलर्ट हो गए हैं। बांध का जलस्तर एकाएक बढ़कर 1374.78 फीट पहुंच गया है। शाह नहर हेड वर्क डिवीजन के अधिशाषी अभियंता ने पत्र जारी कर बांध से सटे हिमाचल के कांगड़ा के जिलाधीश व पड़ोसी राज्य पंजाब के जिलाधीश होशियारपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, एसडीएम मुकेरियां, दसूहा, जवाली, इंदौरा, नूरपुर, फतेहपुर, एसएचओ जवाली, तलवाड़ा, हाजीपुर, इंदौरा को सूचित कर दिया है। उन्होंने बताया है कि कभी भी शाह नहर बैरेज व ब्यास दरिया से पानी छोड़ा जा सकता है। 

पौंग बांध में 1410 फीट तक पानी भंडारण किया जा सकता है। लेकिन 1390 फीट तक पानी पहुंचते ही रेड अलर्ट जारी हो जाता है। 1390 फीट तक पानी पहुंचने से पहले ही पानी को छोड़ना शुरू कर दिया जाता है। जिलाधीश कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि प्रशासन व पुलिस जनता को अलर्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ब्यास दरिया व शाह नहर से कभी भी पानी छोड़ा जा सकता है। कोई भी व्यक्ति खड्ड-नालों सहित दरिया के किनारे न जाए।

जिलों को एसडीआरएफ के तहत 232.31 करोड़ रुपये जारी

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प्रधान सचिव राजस्व ओंकार शर्मा - फोटो : अमर उजाला

सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्राकृतिक आपदा से अभी तक कुल 1,21,401.06 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। प्रधान सचिव राजस्व ने प्रभावित जिलों में एसडीआरएफ के तहत 232.31 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। मुख्य सचिव आरडी धीमान की अध्यक्षता में शनिवार को राज्य सचिवालय में भारी बारिश से हुए नुकसान पर एक अहम बैठक आयोजित की गई। धीमान ने कहा है कि ऊर्जा विभाग पौंग बांध और चमेरा डैम के बारे में जरूरी निर्देश जारी करेगा। अन्य बांध प्राधिकारियों को भी निर्देश देंगे कि वे जलाशयों के जल स्तर पर निगरानी रखें और किसी भी घटना के संबंध में समय पर चेतावनी जारी करें।

इस मौके पर प्रधान सचिव राजस्व ओंकार शर्मा ने पिछले 24 घंटे में प्रदेश में भारी वर्षा से हुई क्षति की जानकारी दी। भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ की कुल 34 घटनाएं हुईं। मुख्य सचिव ने हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के अधिकारियों को बिजली की 100 फीसदी आपूर्ति करने के भी निर्देश दिए हैं। सभी जिलों के पास आपदा राहत और पुनर्वास के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध हैं। पेयजल की 32 योजनाओं को रविवार तक दुरुस्त कर लिया जाएगा। जलजनित रोगों को रोकने के लिए स्थानीय पेयजल स्रोतों में ब्लीचिंग पाउडर डालने के निर्देश दिए हैं। 

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