भारी बारिश और भूस्खलन ने मचाई तबाही, कार पर गिरा पत्थर, डॉक्टर की मौत
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हिमाचल में तीन दिन तक भारी बारिश और भूस्खलन से जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। शिमला के कुमारसैन में पांच मंजिला निर्माणाधीन भवन गिर गया। आनी में चलती कार पर पत्थर गिरने से डॉक्टर की मौत हो गई। शिमला शहर में भूस्खलन से करीब एक दर्जन गाडि़यां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। खराब मौसम ने तीन दिन में सात लोगों की जान ले ली है।
सरकारी और निजी संपत्ति को करोड़ों को नुकसान हुआ है।जिला शिमला के कुमारसैन के नजदीक जाबली में शनिवार आधी रात को पांच मंजिला निर्माणाधीन भवन भरभराकर गिर गया। एनएच- 5 किनारे खाई की तरफ बने इस भवन में कोई नहीं था। घटना के बाद जैसे ही पुलिस को सूचना मिली तुरंत तलाशी अभियान चलाया गया।
किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। करसोग निवासी हेम प्रकाश ने बताया कि भूस्खलन के कारण भवन गिरने से उसे 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। डीएसपी रामपुर अभिमन्यु ने बताया कि मकान निर्माणाधीन था। इसमें कोई नहीं रहता था। मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
उधर, निरमंड के जाओ में चलती कार पर पहाड़ी से पत्थर गिरने से डॉक्टर की मौके पर ही मौत हो गई। शिमला के सुन्नी के जलोग गांव के डॉक्टर रोहित (28) सुबह 11 जाओ से रामपुर की तरफ जा रहे थे कि हादसे का शिकार हो गए। कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है।
एसआई रंजीत टीम के साथ मौके पर पहुंचे और गाड़ी में फंसे शव को निकालकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा। रोहित जाओ अस्पताल में सेवारत थे। हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. जीवानंद चौहान, महासचिव डा. पुष्पेंद्र और कोषाध्यक्ष डा. प्रवीन चौहान ने बताया कि शोक ग्रस्त परिवार को एक लाख रुपये की फौरी राहत दी गई है।
सोलन के ओच्छघाट में शनिवार रात को पहाड़ दरकने से निर्माणाधीन मकान की एक मंजिल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। साथ लगते मकान में भी मलबा जा गिरा। शिमला के तकलेच में भूस्खलन के बाद चार परिवारों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया है।
नेरवा में स्कूल का असुरक्षित भवन और चंबा में एक कच्चा घर गिर गया है। वहीं, मंडी के कोटरोपी में अभी भी मंडी-पठानकोट एनएच बाधित है। प्रशासन ने 31 जुलाई तक मार्ग खोलने का दावा किया है।