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Shimla News: आयुष्मान में पंजीकृत मरीजों के दिल के ऑपरेशन बंद

Mon, 28 Jul 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Jul 2025 11:59 PM IST
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Heart operations of patients registered under Ayushman stopped
आईजीएमसी में बिलों का भुगतान न होने से दवा कंपनियों ने रोकी उपकरणों की आपूर्ति
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30 करोड़ के बिलों का करना है भुगतान
केंद्र से अक्तूबर 2024 से नहीं मिला है पैसा

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में इन दिनों गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब मरीजों के सामने उपचार का संकट गहरा गया है। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क उपचार की आस लेकर आने वाले मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं।

अक्तूबर 2024 से अब तक केंद्र सरकार ने आईजीएमसी को आयुष्मान योजना के तहत भुगतान नहीं किया है जिससे अस्पताल पर करीब 30 करोड़ रुपये की देनदारी हो गई है। इस कारण काॅर्डियोलॉजी और सीटीवीएस जैसे विभागों में हार्ट के ऑपरेशन बंद गए हैं। इससे स्थिति गंभीर बनी हुई है। बहुत से गरीब लोग पहले से आयुष्मान कार्डधारी हैं और अब हिमकेयर का लाभ भी नहीं ले पा रहे हैं। हिमकेयर के तहत ऑपरेशन जरूर हो रहे हैं, लेकिन इसका लाभ केवल इस योजना के तहत पंजीकृत होने वालों को ही मिल रहा है। दोनों योजनाओं में से मरीज केवल एक का ही लाभ ले सकता है। दोनों योजनाओं के तहत पंजीकृत मरीजों का पांच लाख रुपये तक का उपचार मुफ्त में होता है। आयुष्मान योजना के तहत बकाया बिलों का भुगतान न करने से दवा कंपनियों ने उपकरणों और दवाओं की आपूर्ति रोक दी है।
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केस वन
रामपुर निवासी राम लाल (62) दो माह से दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं। इनके पास आयुष्मान कार्ड है और आईजीएमसी में उपचार के लिए आए थे। डॉक्टरों ने तुरंत बाईपास सर्जरी की सलाह दी थी लेकिन आयुष्मान योजना बंद होने से ऑपरेशन नहीं हो सका। हिमकेयर में नामांकन करवाने की कोशिश की लेकिन एक ही स्कीम में पंजीकरण की बाध्यता के चलते वह अब न निजी अस्पताल जा सकते हैं, न सरकारी में उपचार हो पा रहा है। अब वह हर दिन दवा और दर्द के सहारे जीने को मजबूर हैं।
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केस स्टडी टू
मंडी जिले की 55 वर्षीय रानी देवी को हृदय में ब्लॉकेज की शिकायत है। वह गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिता रही हैं और पूरी तरह से आयुष्मान स्कीम पर निर्भर थीं। शिमला पहुंचने पर उन्हें पता चला कि ऑपरेशन फिलहाल नहीं हो पाएगा क्योंकि अस्पताल को पिछले साल से भुगतान नहीं मिला। निजी अस्पताल में 2 लाख रुपये का खर्च बताया गया जो वह वहन नहीं कर सकतीं। इनके बेटे ने हिमकेयर कार्ड के लिए आवेदन किया है लेकिन पुराना आयुष्मान कार्ड हटाए बिना वह भी संभव नहीं।
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