हार्ट अटैक को अस्थमा अटैक बता आईजीएमसी रेफर कर दिया मरीज
हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल तो देखिए, अस्पतालों में मरीजों को बिना चेक किए ही रेफर कर दिया जा रहा है। डॉक्टरों पर काम का बोझ बढ़ने का बहाना बनाकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐसा ही मामला शिमला के दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (रिपन) में सामने आया है। बीते 23 दिसंबर को यहां के इमरजेंसी वार्ड में लाए गए हार्टअटैक के मरीज को अस्थमा का रोगी बताकर इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) रेफर कर दिया गया।
आईजीएमसी में जब मरीज की जांच की गई तो उसे हार्ट अटैक निकला। इसके बाद उसका उपचार शुरू कर ऑपरेशन किया गया। अब मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है। शिमला के रामबाजार निवासी जय श्रीधर की तबीयत खराब होने पर परिजन उन्हें रिपन अस्पताल की इमरजेंसी में लाए थे, लेकिन उन्हें अस्थमा का अटैक बताकर आईजीएमसी रेफर कर दिया था।
उधर शिमला शहरी कांग्रेस के पूर्व महासचिव संजीव कुठियाला अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट से मिले और इस मामले की शिकायत की। रिपन अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लोकेंद्र शर्मा ने कहा कि इस तरह का मामला ध्यान में आया है। मरीज को रेफर क्यों किया गया, इसकी जांच की जाएगी।
एमएस बोले, डॉक्टरों पर बढ़ गया काम का बोझ
दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (रिपन) में रुटीन के मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) करने के आदेश अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) आरडी धीमान ने नवंबर में किए थे। इसके बाद रुटीन के केस आईजीएमसी न जाकर डीडीयू में करने को कहा। बालूगंज, सदर, छोटा शिमला और न्यू शिमला थानों के केस यहां के डॉक्टरों को करने को कहा।
एमएस का कहना है कि कम डॉक्टरों और अतिरिक्त काम के बोझ से चिकित्सा कार्य प्रभावित हो रहा है। हालांकि डॉक्टरों और स्टाफ की कमी को लेकर मामला सरकार के ध्यान में है। हालांकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी पेश नहीं आने दी जा रही है। अस्पताल में व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है।