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इन शिक्षकों को बंधी नियमितीकरण की उम्मीद, सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

Sun, 18 Mar 2018 09:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Sun, 18 Mar 2018 09:42 AM IST
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hearing regarding temporary teachers case in supreme court
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हिमाचल के हजारों शिक्षकों के नियमितीकरण से जुड़े मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। प्रदेश के पैट, पैरा और पीटीए शिक्षकों के नियमितीकरण से जुड़े पंकज कुमार बनाम हिमाचल सरकार मामले की सुप्रीम कोर्ट में 19 मार्च को सुनवाई होगी। 

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पंकज कुमार ने सरकार के खिलाफ  केस वापस लेने के लिए आवेदन किया है। 13 फरवरी को पंकज कुमार ने केस वापस लेने के लिए याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई 19 मार्च को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजय किशन कौल की अदालत में होगी। 
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पंकज कुमार द्वारा केस वापिस लिए जाने से हजारों शिक्षकों के नियमितीकरण की राह आसान होती दिख रही है। वर्ष 2011 में पंकज कुमार ने अस्थायी नियुक्तियों के खिलाफ  हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 

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यहां जानिए क्या है पूरा मामला

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याचिका में हिमाचल सरकार के साथ-साथ ग्रामीण विद्या उपासक, पैरा अध्यापक, पीटीए और पैट अध्यापकों को पार्टी बनाया गया था। अक्तूबर 2013 में हिमाचल हाईकोर्ट ने पैरा अध्यापकों के नियमितीकरण, पीटीए को अनुबंध और पैट को नियमित करने के कैबिनेट के फैसले पर रोक लगा दी थी।

इसके साथ ही तीन और मामले जुड़ गए थे, जिसमें राजेश कुमार, चंद्रमोहन नेगी और शिखा कुशल कुमारी ने भी याचिका दायर की थी। 9 दिसंबर 2014 को हिमाचल हाईकोर्ट से इन अध्यापकों के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। 18 दिसंबर, 2014 को  पैरा अध्यापकों को नियमित करने की अधिसूचना जारी हुई।

पीटीए को अनुबंध पर लाया गया। इसके बाद पंकज कुमार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए जनवरी 2015 में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। पैरा टीचरों में राममूर्ति शर्मा और पीटीए अध्यापकों में विवेक मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय में पहले ही कैवीट दायर कर दी थी।

22 जनवरी 2015 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश विक्रमजीत सेन और न्यायाधीश सी नागाप्न की डबल बेंच ने इस मामले में कैवीट के आधार पर हिमाचल सरकार को यथास्थिति के आदेश दिए थे।

13 फरवरी 2015 को पंकज कुमार व अन्य तीन के केस को सिविल अपील में तबदील कर दिया था और साथ ही अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा था कि भविष्य में हिमाचल सरकार सभी को नौकरी के समान अवसर के आधार पर नियुक्तियां करे।

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