स्मार्ट सिटी: हाईकोर्ट में सरकार ने एमसी शिमला को बताया नाकाम
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राज्य सरकार ने कहा है कि शहर के हजारों लोगों को मूलभूत सुविधा देने में नगर निगम शिमला नाकाम रहा है। शहरवासियों को पानी की सप्लाई, सीवरेज के निपटारे, आशियाना हाउसिंग स्कीम -1 और 2, कूड़ा संयंत्र और ई गवर्नेंस जैसे सुविधा देने में नगर निगम विफल रहा है। यह बात राज्य सरकार ने वीरवार को हाईकोर्ट में दिए एक हलफनामे में कहीं।
सरकार शिमला को स्मार्ट सिटी में शामिल न किए जाने के बाबत अपना पक्ष रखने को कहा गया था। सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत केंद्र सरकार ने वर्ष 2007 से 2012 तक शिमला शहर के लिए करोड़ों रुपये जारी किए। नगर निगम शिमला ने इस पैसा का सही उपयोग नहीं किया।
अभी तक अधर में लटके हैं कई प्रोजेक्ट
आंकड़ों के मुताबिक ऑकलैंड टनल का कार्य हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बाद ही पूरा हो पाया था। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट इंप्रुमेंट से जुड़े प्रोजेक्ट का काम भी अधर में लटका है। सरकार ने कहा जबकि धर्मशाला शहर में विकास कार्यों के लिए उपयुक्त कदम उठाए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2013-14 तक धर्मशाला शहर में पानी की सप्लाई का 70 फीसदी कार्य हुआ। सड़कों से जुड़ी योजनाओं के तहत 65 फीसदी कार्य किया गया।
इसके अलावा धर्मशाला शहर में छोटे और बड़े शहरों को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार से जारी राशि का पूरा इस्तेमाल किया गया। यही कारण है कि स्टेट लेबल हाई पावर कमेटी ने धर्मशाला को 87.5 अंक दिए गए जोकि शिमला की अपेक्षा धर्मशाला को स्मार्ट सिटी योजना में लाने के लिए काफी थे। इस कमेटी के अध्यक्ष प्रदेश के मुख्य सचिव थे। हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई अब 5 नवंबर को होगी।