फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Health secretary should tell why appointment was not given to selected doctors

HP High Court: स्वास्थ्य सचिव शपथपत्र के माध्यम से बताएं चयनित चिकित्सकों को क्यों नहीं दी नियुक्ति

Mon, 15 May 2023 07:46 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 15 May 2023 07:46 PM IST
सार

अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वे शपथपत्र के माध्यम से अदालत को बताएं कि चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति क्यों नहीं दी गई है। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि शपथपत्र दायर न करने की स्थिति में प्रतिकूल आदेश पारित किए जा सकते हैं। 

विज्ञापन
Health secretary should tell why appointment was not given to selected doctors
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति नहीं देने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वे शपथपत्र के माध्यम से अदालत को बताएं कि चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति क्यों नहीं दी गई है। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि शपथपत्र दायर न करने की स्थिति में प्रतिकूल आदेश पारित किए जा सकते हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने मामले की आगामी सुनवाई 31 मई को निर्धारित की है।

विज्ञापन


17 नवंबर 2022 को अदालत ने वॉक इन इंटरव्यू में चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति देने के पक्ष में निर्णय सुनाया था। याचिकाकर्ता ऐश्वर्या ठाकुर और अन्य ने इस निर्णय को लागू करने के लिए याचिका दायर की है। आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने छह महीनों की भीतर भी अदालत के निर्णय को लागू नहीं किया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें दो हफ्ते के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने के आदेश दिए थे। अदालत ने 30 दिसंबर 2022 को अनुपालना रिपोर्ट तलब की थी। उस दिन सरकारी वकील ने आदेशों की अनुपालना के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी।
विज्ञापन


अदालत ने 7 जनवरी 2023 तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी। 6 अप्रैल 2023 को सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हाईकोर्ट के निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा रही है। मामले पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आदेशों पर अमल न करने वाली सरकारी वकील की दलील गुमराह करने वाली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक हाईकोर्ट के आदेश सुप्रीम कोर्ट से स्थगित अथवा निरस्त नहीं हो जाते, तब तक हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना करना सरकार का कर्तव्य है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed