फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Harish Rana story which began with the words, Ill be back in a little while...eventually reached the point of

Harish Rana Euthanasia: थोड़ी देर बाद आता हूं… से शुरू हुई हरीश की कहानी इच्छामृत्यु तक पहुंची

Wed, 18 Mar 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh मनीष कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, जालग (कांगड़ा)।
मनीष कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, जालग (कांगड़ा)। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 18 Mar 2026 06:00 AM IST
सार

जयसिंहपुर उपमंडल के सरी मोलग क्षेत्र के प्लेटा गांव के लोग हरीश राणा के स्वस्थ होकर लौटने की उम्मीद में थे, लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय से इच्छामृत्यु की मंजूरी के मामले के बाद लोग भावुक हैं। 

विज्ञापन
Harish Rana story which began with the words, Ill be back in a little while...eventually reached the point of
हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद

विस्तार

मैं थोड़ी देर बाद आता हूं… से शुरू हुई हरीश राणा की कहानी अब 13 साल के संघर्ष के बाद इच्छामृत्यु के मामले तक पहुंच चुकी है। जयसिंहपुर उपमंडल के सरी मोलग क्षेत्र के प्लेटा गांव के लोग हरीश राणा के स्वस्थ होकर लौटने की उम्मीद में थे, लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय से इच्छामृत्यु की मंजूरी के मामले के बाद लोग भावुक हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भले ही हरीश राणा का परिवार वर्षों पहले रोजगार के सिलसिले में प्रदेश से बाहर बस गया हो, लेकिन प्लेटा गांव से कभी नाता नहीं तोड़ा।

विज्ञापन

अशोक राणा ने कोविड से पूर्व गांव में नया मकान बनाया था और कोरोना काल में जब काम धंधे बंद थे तो यहीं परिवार के साथ समय बिताया था। कच्छाल जग्गियां गांव निवासी हरीश राणा के मामा मिलाप सिंह ने बताया कि हरीश बचपन से अपने ननिहाल से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ था और पढ़ाई के दौरान भी लंबे समय तक उनके साथ रहा। 20 अगस्त 2013, रक्षाबंधन के दिन ममेरे भाई ने जब उसे राखी बंधवाने चलने को कहा, तो हरीश ने हंसते हुए जवाब दिया.. आप चलो, मैं थोड़ी देर बाद आऊंगा… लेकिन किसे पता था कि यह उसकी आखिरी सामान्य बातचीत होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

इसके बाद वह चौथी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलते ही मामा पीजीआई पहुंचे, लेकिन इसके बाद हरीश कोमा में चला गया और फिर कभी होश में नहीं आ सका। इलाज के लिए परिवार ने दिन-रात एक कर दिए, यहां तक कि दिल्ली का घर भी बेचना पड़ा और गाजियाबाद में बसना पड़ा। मिलाप सिंह बताते हैं कि घर का एक कमरा अस्पताल बन गया था, जहां हरीश वर्षों तक मशीनों के सहारे जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा।

विज्ञापन

पड़ोसी सुदेश कुमारी ने भावुक होते हुए बताया कि जब भी हरीश बचपन में गांव आता था, तो सभी बच्चे मिलकर खेलते थे और पूरे माहौल में रौनक सी लग जाती थी। उन्होंने कहा कि इस खबर को सुनकर वे बेहद व्यथित हैं और पुराने दिन याद कर मन भर आता है। वहीं ग्राम पंचायत सरी के उपप्रधान राजू राणा ने भी इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। कहा कि यह अत्यंत दुखद और संवेदनशील मामला है। उन्होंने परिवार के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि पूरा क्षेत्र इस कठिन समय में उनके साथ खड़ा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed