बेहद खास है 331 साल पुरानी ये तलवार, देखने के लिए लगती है भीड़
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ये कोई आम तलवार नहीं है। जैसे ही इसे म्यान से बाहर निकाला गया था कि इसके दर्शनों के लिए लोगों का सैलाब उमड़ आया था। लोग दूर दूर से इस तलवार के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं। लोग इसे चमत्कारी मानते हैं। लोग मानते हैं कि जब ये तलवार हिमाचल के नाहन लाई गई, उसके बाद से नाहन का आश्चर्यजनक तरीके से विकास होने लगा।
331 साल पुरानी इस तलवार की कहानी बड़ी ही रोचक है। आज से ठीक 331 साल पहले 30 अप्रैल, 1684 के दिन सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह तत्कालीन सिरमौर रियासत के दौरान नाहन पहुंचे थे।
इस दिन को नाहन में हर वर्ष गुरु पर्व के रूप में मनाते हैं। उस समय सिरमौर रिसायत के शासक मेदनी प्रकाश थे। इतिहास में दर्ज है कि गुरु गोबिंद सिंह एवं मेदनी प्रकाश के बीच मिलेट्री संधि हुई थी। इसी संधि से इस तलवार को जोड़कर देखा जाता है।
गुरु गोबिंद सिंह ने दी थी ये तलवार
कहा जाता है कि संधि के दौरान गुरु गोबिंद सिंह और मेदनी प्रकाश दोनों ने एक-दूसरे को तलवारें भेंट की थीं। जानकार बताते हैं कि गुरु गोबिंद सिंह की तलवार बाद में सोढी शासकों के पास सुरक्षित थी। मेदनी प्रकाश को भेंट में मिली तलवार आज भी जयपुर राजघराने के पास मौजूद है।
गुरु गोबिंद सिंह की ओर से भेंट की गई इस ऐतिहासिक तलवार को जयपुर रिसायत की महारानी पदमिनी देवी अपने दोहते के मंगलतिलक के दौरान मई 2013 को नाहन लेकर आई थीं। इसे दर्शनों के लिए नाहन गुरुद्वारे में रखा गया था।
उस श्रद्धालुओं में तलवार को छूकर उसका आशीर्वाद लेने की होड़ मच गई थी। तलवार को म्यान से भी निकाला गया था। श्रद्धालुओं के मन में इस बात की टीस है कि गुरु गोबिंद सिंह की तलवार राजघराने के बजाय नाहन गुरुद्वारे में होती तो ज्यादा बेहतर होता, जबकि राजपरिवार का तर्क है कि यह तलवार तो गुरु गोबिंद सिंह ने मेदनी प्रकाश को भेंट की थी। उन्हें मेदनी प्रकाश की ओर से भेंट की गई ऐतिहासिक तलवार के बारे में जानकारी जुटानी चाहिए।
ऐसे सामने आई थी तलवार
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एएस शाह का कहना है कि गुरु गोबिंद सिंह 30 अप्रैल, 1684 को नाहन आए थे। सिरमौर के शाही महल की संपत्ति को लेकर 80 के दशक में कानूनी वारिसों के बीच विवाद पैदा हुआ था। तब जयपुर की राजमाता ने इस बात को स्वीकार किया था कि कानूनी वारिस होने के नाते गुरु गोबिंद सिंह की ओर से भेंट की गई तलवार उनके कब्जे में है।
नाहन शाही महल से जुड़े कंवर अजय बहादुर ने बताया कि 331 साल पहले मेदनी प्रकाश एवं गुरु गोबिंद सिंह के बीच मिलेट्री संधि हुई थी। इसमें दोनों ने एक दूसरे को तलवारें भेंट की थी। मेदनी प्रकाश की तलवार आज भी जयपुर महल में है।
सिरमौर रिसायत का यह है इतिहास
जयपुर की महारानी पदमिनी देवी सिरमौर के अंतिम शासक महाराजा राजेंद्र प्रकाश की बेटी हैं। जिनका विवाह जयपुर राजघराने में ब्र्रिगेडियर भवानी सिंह के साथ हुआ था। सिरमौर रियासत के अंतिम शासक राजेंद्र प्रकाश का 1964 में देहावसान हो गया था। उनका कोई पुत्र नहीं था। इसलिए 15 मई 2013 को शाही महल नाहन से पदमिनी देवी के दोहते एवं दिया कुमारी के पुत्र 8 वर्षीय लक्ष्यराज प्रकाश को भव्य ‘मंगल तिलक’ समारोह में उत्तराधिकारी घोषित किया गया था।