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तीन फर्जी कंपनियां बना किया जीएसटी फर्जीवाड़ा, 30.40 करोड़ की होगी वसूली

Sat, 24 Apr 2021 11:01 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, गगरेट (ऊना)
अमर उजाला नेटवर्क, गगरेट (ऊना) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 24 Apr 2021 11:01 AM IST
सार

गगरेट क्षेत्र की एक कंपनी के सीईओ पर तीन फर्जी कंपनियां बनाकर 13 करोड़ रुपये जीएसटी का फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। इस पर कार्रवाई करते हुए संयुक्त आयुक्त राज्य कर एवं आबकारी मध्य प्रवर्तन क्षेत्र ऊना राकेश भारतीय ने कंपनी पर 30.40 करोड़ रुपये ब्याज, जीएसटी व जुर्माना लगाया है। पंजाब के रहने वाले फर्जीवाड़े के आरोपी की जल्द गिरफ्तारी हो सकती है। जानकारी के अनुसार राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने गगरेट की एक कंपनी के दस्तावेजों का निरीक्षण किया।

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GST fraud in gagret una himachal by making three fake companies thirty crore rupee recovery by himachal pradesh Excise and Taxation Department
वस्तु एवं सेवा कर - फोटो : iStock

विस्तार

गगरेट क्षेत्र की एक कंपनी के सीईओ पर तीन फर्जी कंपनियां बनाकर 13 करोड़ रुपये जीएसटी का फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। इस पर कार्रवाई करते हुए संयुक्त आयुक्त राज्य कर एवं आबकारी मध्य प्रवर्तन क्षेत्र ऊना राकेश भारतीय ने कंपनी पर 30.40 करोड़ रुपये ब्याज, जीएसटी व जुर्माना लगाया है। पंजाब के रहने वाले फर्जीवाड़े के आरोपी की जल्द गिरफ्तारी हो सकती है। जानकारी के अनुसार राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने गगरेट की एक कंपनी के दस्तावेजों का निरीक्षण किया।

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इसमें पता चला कि कंपनी तीन अन्य फर्मों से अपने लिए खरीद दिखाकर गलत तरीके से आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का लाभ ले रही थी। तीनों फर्में उक्त फर्म के सीईओ ने सिर्फ कागजों में बनाई थी। फर्म के सीईओ ने शपथ पत्र देकर खुद इस बात को कबूल किया है। उक्त फर्म के तीन निदेशकों में से एक ने माना कि इस फर्जीवाडे में उसकी भूमिका नहीं है। जांच में यह सामने आया कि बिना बताए एक निदेशक के नाम पर समस्त जमीन खरीदी थी।
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अन्य दो निदेशकों के जीएसटी पोर्टल पर दर्शाए पते के अनुसार लुधियाना में जाकर जांच की गई, लेकिन वे वहां नहीं मिले। दो फर्में जिन्हें उक्त फर्म सामान बेचती थी, वह भी फर्जी थी और उनके मालिकों ने शपथ पत्र देकर बताया कि यह समस्त फर्जीवाड़ा फर्म के सीईओ ने किया। तीन फर्में, जिनसे गगरेट स्थित फर्म खरीद करती थी, वे भी फर्जी निकली।
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आरोप है कि यह फर्जीवाड़ा सीईओ ने जाली बिल जारी करके बैंक लोन लेने के लिए किया। इस पूरे रैकेट में किसी भी फर्म ने किसी भी स्तर पर कोई जीएसटी नहीं दिया, बल्कि सर्कुलर बिलिंग करके लगभग 98.87 प्रतिशत बिल आपस में ही जारी करके जीएसटी की चोरी की।


संयुक्त आयुक्त राज्य कर एवं आबकारी मध्य प्रवर्तन क्षेत्र ऊना राकेश भारतीय ने बताया कि फर्जीवाड़े में 108,14,36,786 रुपये की फर्जी खरीद की हुई है। शुक्रवार को मामले में अंतिम फैसला लिया गया, जिसमें 13,02,41,081 रुपये का आईटीसी रद्द किया गया। ब्याज के रूप में लगभग 4,35,90,193 रुपये, जीएसटी के बराबर 13,02,41,081 रुपये जुर्माना लगाकर कुल 30,40,72,355 रुपये की अतिरिक्त वसूली आरोपी से की जाएगी।

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