GST से उद्यमियों में हड़कंप, छिन सकता है 30 फीसदी विशेष पैकेज
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वस्तु एवं सेवा कर विधेयक राज्यसभा में पारित होते ही हिमाचल के उद्यमियों और फार्मा हब बीबीएन में उथल-पुथल मच गई है। तर्क दिया जा रहा है कि जीएसटी से प्रदेश की करीब 30 फीसदी इंडस्ट्री से विशेष पैकेज के लाभ की सुविधा छिन सकती है।
इसमें केंद्रीय उत्पाद शुल्क, आयकर और वैट में राहत शामिल है। एक समान टैक्स होने से प्रदेश को भविष्य में विशेष औद्योगिक पैकेज का दर्जा मिलने की आस भी टूट जाएगी। प्रदेश से विशेष औद्योगिक पैकेज का दर्जा 2010 से छिन गया है।
2006 के बाद स्थापित उद्योगों को यह लाभ 2020 यानी आगामी साढ़े तीन साल तक मिलता रहेगा। इसके बाद औद्योगिक पैकेज पूरी तरह समाप्त होगा। करीब 30 फीसदी इंडस्ट्री अभी इस दायरे में बताई जा रही है। फार्मा हब के रूप में विकसित प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री को जीएसटी का नुकसान उठाना पड़ेगा। दवाओं में एमआरपी पर टैक्स लगता है।
जीएसटी लागू होने से सेल प्राइज पर एक्साइज लगेगी। इससे बाहरी प्रदेशों के मुकाबले हिमाचल में गैप काफी कम हो जाएगा। हालांकि, अभी सेंटर जीएसटी, स्टेट जीएसटी और इंटेग्रेटिड जीएसटी पर कानून बनना है, लेकिन देश भर में समानांतर टैक्स भी पक्का है।
जीएसटी उत्पादक और ग्राहक को ऐसे फायदा
बाहरी राज्यों से कच्चा माल मंगवाने और फिर बाहर बेचने को बार-बार टैक्स नहीं देना पड़ेगा। मान लीजिए फार्मा को छोड़ अन्य इंडस्ट्री का रॉ मैटीरियल यूपी या दिल्ली से आ रहा है। 2 फीसदी सीएसटी कच्चा माल बद्दी में लाया जा रहा है।
इस पर टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिल रहा, क्योंकि यह माल बाहर से लाया गया है। विदन स्टेट परचेज पर लाभ मिलता है। मतलब यह दो फीसदी वापस नहीं होगा। इसके बाद बद्दी में माल तैयार कर उत्पादक वापस डेढ़ फीसदी टैक्स दोबारा देकर दिल्ली भेजता है।
ऐसे में उत्पाद की इनपुट कास्ट बढ़ती है। यह तैयार माल में शामिल होती है। जीएसटी से प्रदेश में 2 फीसदी सीएसटी का क्रेडिट टैक्स का लाभ मिलेगा। उद्यमी वापस दिल्ली भेजने वाले माल से कर घटा सकेगा।
स्थानीय कर होंगे समाप्त
जीएसटी से राज्य के करीब 12 कर समाप्त होंगे। शराब, पेट्रोलियम, यातायात पर नेशनल परमिट, एडिशनल गुड्स टैक्स इसके दायरे में बाहर होने की बात कही जा रही है।
मूल्य वर्धित कर वैट (1 से 100 फीसदी), लग्जरी टैक्स (10 फीसदी), एंट्री टैक्स (2 से 6 फीसदी), सर्टन गुड्स कैरिड बाय रोड टैक्स, एंटरटेनमेंट टैक्स और एंटरटेनमेंट ड्यूटी के अलावा केंद्र के सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सेंटर सर्विस टैक्स आदि भी खत्म होगा।
इससे उत्पादकों समेत छोटे-बड़े कारोबारियों को टैक्स रिटर्न के अलावा टैक्स के लंबे झंझटों से बचना पड़ेगा। महज जीएसटी उन्हें एक समान देना होगा।
टैक्स 10-15 फीसदी घटेगा, पैकेज पर खतरा : शैलेष
बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रधान शैलेष अग्रवाल का कहना है कि जीएसटी से टैक्स क्रेडिट, एक सामान टैक्स और स्थानीय कर समाप्त होने से टैक्स 10-15 फीसदी घटने की उम्मीद है। इससे न केवल उद्यमियों को लाभ होगा, बल्कि उत्पाद सस्ते होने से आम लोगों को भी।
जहां तक विशेष पैकेज के लाभ की बात है, वह छिन सकता है। 2020 में पैकेज पूरी तरह समाप्त होगा। हो सकता है कि सरकार ने इस संबंध में कुछ सोचा हो। जीएसटी देने के बाद वांछित लाभ उद्यमियों को बाद में वापस मिले।
फार्मा हब के लिए घाटा : प्रधान
हिमाचल ड्रग्स मेन्युफेक्चर एसोसिएशन फार्मा एसोसिएशन के प्रधान एमबी गोयल ने कहा कि जीएसटी लागू होने से देश के सबसे बड़े फार्मा मेन्युफेक्चर सेक्टर पर बुरा असर पड़ेगा। फार्मा में एमआरपी पर टैक्स लगता है।
मतलब उनका एक उद्योग जयपुर में है तो दूसरी बद्दी में और वह किसी कंपनी के लिए 100 एमआरपी का प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं तो उन्हें 60 रुपये से ऊपर एक्साइज देना पड़ेगा। विशेष पैकेज हिमाचल राज्य में उन्हें जो एक्साइज देना होगा, वह रिफंड होगा। जीएसटी के बाद वह गैप कम हो जाएगा।
हिमाचल इंडस्ट्री एक नजर में (17/9/2015 तक)
लार्ज स्केल इंडस्ट्री 0137
मीडियम 0368
स्माल इंडस्ट्री 4015
ये फायदे, ये नुकसान भी होंगे
नुकसान
2020 तक पूरी तरह खत्म होगा विशेष पैकेज
2010 में खत्म विशेष इंडस्ट्री पैकेज का लाभ
30 फीसदी इंडस्ट्री अभी तक है इसी दायरे में
राहत
वैट, एंट्री टैक्स समते कई राज्य करों से निजात
पैकेज खत्म कर चुकी उद्योगों को भी राहत
अन्य क्षेत्रों में भी मिल सकेगा टैक्स क्रेडिट
सस्ती होंगी हिमाचल में उत्पादित कई वस्तुएं