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जीएसआई के पूर्व निदेशक बोले, हो सकती है बड़ी तबाही
ब्यूरो/ अमर उजाला, धर्मशाला
Updated Sun, 17 May 2015 10:26 AM IST
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जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व निदेशक एनएन अग्रवाल ने हिमाचल में बन रही बिजली परियोजनाओं के बांधों को भूकंप की दृष्टि से खतरनाक बताया है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट के रेजरवायर में जमा पानी से धरती पर भार पड़ता है।
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भूकंप आने की वजह एक वजह यह भी है। महाराष्ट्र में कुछ समय पहले आए भूकंप की वजह कोयना डैम था। इसकी अभी जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि बांधों के लिए बनने वाली सुरंगों से पहाड़ कच्चे हो जाते हैं। भूकंप आने पर यह बड़ी तबाही का कारण बनते हैं।
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भूकंप आने पर डैम में जमा पानी समतल आबादी वाले इलाकों को चपेट में लेता है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट बनाते समय ऐसी तकनीक अपनानी चाहिए जो भूकंप आने पर अगर बांध टूटे तो पानी आबादी की तरफ डायवर्ट न हो।
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उन्होंने कहा कि हिमाचल में बन रहे बहुमंजिला भवन भूकंप की दृष्टि से सुरक्षित नहीं हैं। भूकंप आने पर चौथी-पांचवीं मंजिल से उतरने का रास्ता सिर्फ सीढ़ियां ही होती हैं। ऐसे में आपदा के समय भगदड़ मचने का डर रहता है।
इसलिए, नए बनने वाले बहुमंजिला भवनों के लिए सरकार को नियम तय करने चाहिए। बहुमंजिला भवनों में रैंप होना चाहिए। नए भवन भूकंपरोधी तकनीक से बनने चाहिए। शहरों को जियोलॉजिकल मैप के तहत बसाना चाहिए।
धर्मशाला के पहाड़ कमजोर- एनएन अग्रवाल ने कहा कि धर्मशाला शहर भूकंप की दृष्टि से जोन पांच में आता है जो संवेदनशील है। शहर के दोनों ओर के पहाड़ों में दरारें हैं। धर्मशाला की चट्टानें और पहाड़ भूकंप के लिहाज से कमजोर हैं। सरकार को प्राकृतिक आपदा बचने के लिए पूरा प्लान बनाना चाहिए।