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शिमला: बागवान बोले- पकने के बाद सेब नहीं तोड़ा तो बरबाद हो जाएगी करोड़ों की फसल, पेड़ों से सेब झड़ने का खतरा

Fri, 27 Aug 2021 02:17 AM IST
Krishan Singh विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला, शिमला
विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 27 Aug 2021 02:17 AM IST
सार

बागवानों का कहना है कि पकने के बाद सेब नहीं तोड़ा तो फसल बरबाद हो जाएगी। अधिक पकने की सूरत में सेब पेड़ों से झड़ जाएगा। मौजूदा समय में फसल को रोकना संभव नहीं है। बागवानों ने सरकार से सीए स्टोर की सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग उठाई है। 

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growers said that Crops worth crores will be ruined if the apple is not plucked after ripening
हिमाचल के सेब बागवान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में सेब के दामों में भारी गिरावट के बाद मुख्यमंत्री का मार्केट में कम फसल भेजने का सुझाव बागवानों के गले नहीं उतर रहा। बागवानों का कहना है कि पकने के बाद सेब नहीं तोड़ा तो फसल बरबाद हो जाएगी। अधिक पकने की सूरत में सेब पेड़ों से झड़ जाएगा। मौजूदा समय में फसल को रोकना संभव नहीं है। बागवानों ने सरकार से सीए स्टोर की सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग उठाई है। राज्य में सरकारी क्षेत्र के कोल्ड स्टोरों की क्षमता महज 20 से 30 हजार मीट्रिक टन है। इसलिए बाहरी राज्यों के सीए स्टोर में प्रदेश के बागवानों की फसल रखने की व्यवस्था की सरकार से मांग उठाई जा रही है। बागवानों ने सरकार से कश्मीर की तर्ज पर नेफेड के जरिये एमआईएस के तहत सेब खरीद करने की भी मांग उठाई है।

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कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद तनाव की स्थिति के चलते केंद्र सरकार ने नेफेड के जरिये सेब उत्पादकों के लिए डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम (डीबीटी) लागू की थी और पांच हजार करोड़ का सेब खरीदा था। इसी तर्ज पर हिमाचल में भी सेब खरीद की मांग उठाई जा रही है। किसान संघर्ष समिति के महासचिव संजय चौहान का कहना है कि सरकार को एमआईएस के तहत ए ग्रेड 60 रुपये, बी ग्रेड 44 रुपये और सी ग्रेड का सेब 24 रुपये प्रति किलो के रेट पर खरीदना चाहिए। रेट गिरने के बाद बागवानों को राहत देने के लिए कोई कोई रास्ता निकल सके इसके लिए संयुक्त किसान मंच ने सितंबर के पहले सप्ताह में बैठक बुलाई है। मंच मुख्यमंत्री से भी यह मामला उठाने जा रहा है। सेब की मार्केट गिरने के बाद कॉरपोरेट कंपनियों की मनमानी झेल रहे सूबे के बागवान फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का महत्व भी समझने लगे हैं। सरकार से सेब के लिए एमएसपी लागू करने की मांग भी उठाई जा रही है।
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क्या कहते हैं बागवान प्रतिनिधि
2 या 4 दिन से ज्यादा होल्ड नहीं हो सकता सेब : हरीश
मुश्किल से सेब 2 या 4 दिन होल्ड किया जा सकता है, इससे ज्यादा नहीं। बागवानों को सीए स्टोर की सुविधा चाहिए। सरकार को कश्मीर की तर्ज पर एमआईएस के तहत सेब खरीद करनी चाहिए तभी बागवानों को राहत मिल सकती है। - हरीश चौहान, संयोजक, संयुक्त किसान मंच हिमाचल प्रदेश
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नहीं तोड़ा तो बागीचों में ही झड़ जाएगा सेब : प्रेम चौहान
पकने के बाद पेड़ से सेब नहीं तोड़ा गया तो बागीचे में ही झड़ जाएगा। मंडियों में सेब भेजना बंद नहीं किया जा सकता। ज्यादा पका सेब स्टोरेज में भी नहीं डाला जा सकता। देनदारियां निपटाने के लिए बागवानों को पैसा चाहिए, फसल नहीं रोकी जा सकती। - प्रेम चौहान शैंटू, सेब की ऐप्स वैरायटी के जनक जलटार कोटखाई

पकने के बाद सेब का तुड़ान रोकना मुश्किल : डॉ. विजय

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डॉ. विजय सिंह ठाकुर, पूर्व कुलपति, बागवानी विश्वविद्यालय नौणी - फोटो : अमर उजाला

पक जाने के बाद सेब का तुड़ान नहीं रोका जा सकता। मैच्योरिटी के बाद तुड़ान न होने से सेब का ग्लूकोज सोरबिटॉल में बदल जाता है, जिससे सेब खाने योग्य नहीं रहता। ओवर मैच्योर होने पर सेब गलना शुरू हो जाता है और खुद ही पेड़ से झड़ जाता है। फूल से फल बनने के बाद सेब तैयार होने की प्रक्रिया 120 दिन चलती है। इसके बाद इसे इस्तेमाल करना होता है। एक हफ्ते भी अगर सेब को सामान्य तापमान में होल्ड किया जाए तो यह खराब होना शुरू हो जाता है।
- डॉ. विजय सिंह ठाकुर, पूर्व कुलपति, बागवानी विश्वविद्यालय नौणी 

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