स्कूलों से गायब रहने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कसने की तैयारी पूरी
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों से गायब रहने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कसने की तैयारी पूरी हो गई है। राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों के औचक निरीक्षण को गठित किए गए निरीक्षण निदेशालय को हरी झंडी दे दी है। शिक्षा विभाग ने निरीक्षण निदेशालय की अधिसूचना जारी कर दी है। अब ड्यूटी में कोताही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लापरवाह शिक्षकों को बर्खास्त भी किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की बजट भाषण के दौरान शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए निरीक्षण निदेशालय गठित करने की घोषणा की थी। 27 मई 2016 को राज्य मंत्रिमंडल ने निरीक्षण निदेशालय के गठन को मंजूरी दी थी। अब शिक्षा विभाग ने निदेशालय के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। निरीक्षण निदेशालय के तहत 80 अफसरों और कर्मचारियों को शामिल किया गया है। राजधानी शिमला स्थित शिक्षा निदेशालय से ही निरीक्षण निदेशालय काम करेगा।
इन्हें दिया औचक निरीक्षण का जिम्मा
सरकार ने निदेशालय के तहत 12 उपनिदेशकों, 20 प्रधानाचार्यों, 20 खंड प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों, 13 अधीक्षक ग्रेड वन और वरिष्ठ सहायकों, 14 कनिष्ठ कार्यालय सहायकों और एक स्टेनो को शामिल किया है। यह अफसर और कर्मचारी स्कूलों के औचक निरीक्षण का जिम्मा संभालेंगे।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मई महीने में जिला सोलन के अर्की में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित बनाने के लिए प्रदेश में निरीक्षण निदेशालय का गठन किया जाएगा। निदेशालय निश्चित करेगा कि
अध्यापक अपना कार्य पूरे समर्पण भाव से करें। इसके लिए निदेशालय की ओर से नियमित तौर पर विद्यालयों का औचक निरीक्षण और निगरानी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा था कि ड्यूटी में कोताही बरतने वाले शिक्षकों को बिना नोटिस के बर्खास्त किया जाएगा।