शहरों में अवैध निर्माण के लिए सरकारें जिम्मेदार, जनता को दिखाए जाते है ऐसे सपने
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हिमाचल में हो रहे अवैध निर्माण के लिए भाजपा और कांग्रेस सरकारें जिम्मेवार हैं। विधानसभा चुनाव के चलते नेता प्रदेश की जनता को भवन नियमित कराने का झांसा देते हैं। जनता भी नेताओं की बातों में आकर अवैध निर्माण को बढ़ावा देते हैं, जिसका खामियाजा अफसरशाही और जनता को भुगतना पड़ता है।
जब भी अफसर फील्ड में कार्रवाई को अंजाम देते हैं, नेताओं के फोन आकर कार्रवाई को रोकने का दबाव बनाया जाता है। यही नहीं, अफसरों को तबादले तक की धमकियां मिलती हैं। हिमाचल में अवैध निर्माण 20 साल से हो रहा है।
हालांकि बीच बीच में कार्रवाई भी हुई है लेकिन यह कार्रवाई आम आदमी पर हुई है। अफसरों ने न तो नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम दिया न ही रसूखदारों पर हाथ डाला है। अधिकारियों ने भी हमेशा ही साफ्ट टारगेट देखकर आम आदमी पर कार्रवाई की है।
हिमाचल में कांग्रेस और भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों ने भी अवैध निर्माण किया है। होटल बनाने में अतिक्रमण हुआ है लेकिन नेताओं के दबाव के चलते अफसर इन पर हाथ डालने से कतराते हैं।
हिमाचल में 30 हजार अवैध निर्माण
हिमाचल में 30 हजार के करीब अवैध निर्माण हैं। कइयों ने बेसमेंट खोल दी है तो कइयों ने अतिरिक्त मंजिलें बना दी हैं। लोगों ने एटिक तक में कमरे निकालकर बिजली और पानी के कनेक्शन लगा दिए हैं। इसमें मंत्रियों के रिश्तेदार तक शामिल हैं। विधायकों के करीबियों ने भी सरकारी जमीनें हड़प रखी हैं।
प्रदेश प्रैक्टिसिंग आरकिटेक्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव वर्मा ने कहा कि अवैध निर्माण सरकारों ने करने दिया और लोग भी निर्माण करने में पीछे नहीं हटे। सरकार को अब एक बार अवैध भवनों को नियमित करने का मौका देना चाहिए। इसके बाद अगर कोई अवैध निर्माण करता है तो उस पर सख्ती की जाए।
छह बार बनाईं भवन नियमित करने को पॉलिसियां
हिमाचल में करीब 6 बार भवन नियमित करने को लेकर पॉलिसियां बनाई गई हैं। कई पॉलिसी स्थानीय स्तर पर तो कई राज्य स्तर पर आई हैं। इसमें लोगों को 20 से लेकर 40 फीसदी तक डेविएशन करने में छूट दी गई थी। ज्यादातर सरकार की यह पॉलिसियां कोर्ट में फंस र्गइं।