कांगड़ा: राज्यपाल आर्लेकर बोले- सबसे पुराने मधुमक्खी अनुसंधान केंद्र के आधुनिकीकरण की जरूरत
सोमवार को इस अनुसंधान नगरोटा बगवां के हटवास में स्थापित देश के सबसे पुराने मधुमक्खी पालन अनुसंधान केंद्र के दौरे के दौरान राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने इस केंद्र को देश की धरोहर बताते हुए कहा कि इस केंद्र की पुरातनता बनाए रखने के साथ आधुनिकतम तकनीक से इसे बढ़ाने की आवश्यकता है।
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राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने नगरोटा बगवां के हटवास में स्थापित देश के सबसे पुराने मधुमक्खी पालन अनुसंधान केंद्र के आधुनिकीकरण, प्रचार व प्रसार को लेकर गहरी दिलचस्पी दिखाई है। तत्कालीन पंजाब प्रांत के लायलपुर (पाकिस्तान) महाविद्यालय के कृषि विभाग की ओर से 1936 में लगभग 13 कनाल भूमि पर स्थापित इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य भारतीय मौन एपिस इंडिका से वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित कर किसानों को इस व्यवसाय से जोड़ना था। 1936 से भारत की आजादी तक यह केंद्र लायलपुर कॉलेज का हिस्सा रहा। बाद में इसे पंजाब कृषि विश्वविद्यालय तथा उसके बाद इसे कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के अधीन कर दिया गया। सोमवार को इस अनुसंधान केंद्र के दौरे के दौरान राज्यपाल ने इस केंद्र को देश की धरोहर बताते हुए कहा कि इस केंद्र की पुरातनता बनाए रखने के साथ आधुनिकतम तकनीक से इसे बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इस केंद्र की ओर से उपलब्ध करवाए जाने वाले उत्तम गुणवत्ता के शहद का विस्तार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां के शहद की ब्रांडिंग करके पूरे देश में यदि मार्केटिंग की जाए तो इस प्रदेश की एक अलग पहचान भी बनेगी। राज्यपाल ने कहा कि इस दिशा में संबंधित विभाग के प्रयास अच्छे हैं। इस मौके पर राज्यपाल को केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक सुरिंदर शर्मा ने मधुमक्खी पालन की प्रक्रिया और मधु के उत्पादों की जानकारी हासिल करवाई गई। इस मौके पर विधायक अरुण कुमार कूका, डीसी निपुण जिंदल, एसपी खुशहाल शर्मा, एसडीएम शशिपाल नेगी, निदेशक शशिपाल दीक्षित, विभाग अध्यक्ष आरएस चंदेल, जनसंपर्क विभाग के सह निदेशक डॉ. हृदयपाल सिंह तथा कृषि विश्वविद्यालय के कई अधिकारी उपस्थित थे।
पारंपरिक कृषि और स्थानीय बीजों के भी संरक्षण में करें योगदान: आर्लेकर
वहीं, राज्यपाल एवं कृषि विवि के कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने पारंपरिक कृषि के साथ-साथ स्थानीय बीजों के विकास और संरक्षण की दिशा में भी कार्य करने पर जोर दिया है। कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में विभागाध्यक्षों और विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पहले उद्योगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम तैयार किए जाते थे और इसी अनुसार शिक्षा पद्धति आगे बढ़ रही थी। लेकिन, आज समाज की क्या जरूरत है, इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है और शिक्षा को भी इसी दिशा में आगे ले जाना है। इसी अनुरूप हमें भी अनुसंधान और पाठ्यक्रम भी बदलना जरूरी है। पारंपरिक कृषि को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय को औषधीय पौधों को बढ़ावा देने के लिए कुछ विद्यालयों को अपनाने के निर्देश दिए। पारंपरिक बीजों का संरक्षण किया जाना चाहिए और पंचायत स्तर पर जैव विविधता रजिस्टर बनने चाहिए। राज्यपाल ने युवाओं में बढ़ते नशे पर चिंता जताई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एचके चौधरी ने राज्यपाल का स्वागत किया। डॉ. जीसी नेगी कॉलेज ऑफ वेटरनेरी एंड एनिमल साइंस के डीन डॉ. मनदीप शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इससे पूर्व राज्यपाल ने वेटरनेरी कॉलेज का दौरा किया।