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हाथ में छड़ी लेकर तीन किलोमीटर पहाड़ चढ़ कर यहां पहुंचे राज्यपाल

Wed, 20 Sep 2017 11:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मलाणा (कुल्लू)
ब्यूरो/अमर उजाला, मलाणा (कुल्लू) Updated Wed, 20 Sep 2017 11:09 AM IST
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governor of himachal acharya devvrat on malana kullu tour

हाथ में ट्रैकिंग छड़ी लेकर तीन किलोमीटर लंबे बेहद खतरनाक पहाड़ी रास्ते पर पैदल मार्च कर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत मलाणा गांव पहुंचे। वे पहले राज्यपाल हैं जो अति दुर्गम क्षेत्र मलाणा पहुंचे। उन्होंने सवा घंटे में दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई और एक किलोमीटर की उतराई पैदल पार की। 

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विश्व के प्राचीनतम लोकतंत्र माने जाने वाले मलाणा गांव में जैसे ही राज्यपाल पहुंचे ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल गए। इस दौरान गांव में कूड़ा-कचरा दिखा तो उन्होंने खुद ही झाड़ू उठा ली। ग्रामीणों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया। नशे से दूर रहने और जड़ी-बूटियों के उत्पादन को लेकर प्रेरित किया।
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उन्होंने उज्ज्वला योजना के तहत गृहिणियों को गैस चूल्हे और सिलेंडर भी वितरित किए। राज्यपाल का मलाणा का दौरा बेहद मुश्किल लेकिन रोमांचक भी रहा। सुबह करीब 8.30 बजे राज्यपाल का काफिला शाढ़ाबाई स्थित बिजली बोर्ड के रेस्ट हाउस से मलाणा की ओर रवाना हुआ। उनके साथ पत्नी दर्शना देवी और अधिकारी भी थे। 
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करीब डेढ़ घंटे में गाडि़यों का काफिला नेरांग पहुंचा। आगे सड़क न होने से वे नेरांग से मलाणा के लिए पैदल रवाना हुए। कुर्ता पायजामा और स्पोर्ट्स शूज पहने राज्यपाल ने सहारे के लिए ट्रैकिंग छड़ी ली। बीच रास्ते में कई जगह उन्होंने एक-दो मिनट का विश्राम लिया और मंजिल की तरफ बढ़ते रहे। 

रास्ते में अफसरों ने राज्यपाल को गांव के इतिहास और कल्चर के बारे में बताया। रास्ते में मिले बच्चों को राज्यपाल ने दुलार किया। बुजुर्गों और महिलाओं को अभिवादन करते गए। पर्यटकों से भी रूबरू हुए और उनसे यहां की खासियतों के बारे में बातचीत की। 

करीब सवा घंटे पैदल चलकर आचार्य देवव्रत ऐतिहासिक मलाणा गांव पहुंचे। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी राज्यपाल आचार्य देवव्रत फिर पैदल मलाणा से नेरांग पहुंचे। उनके चेहरे पर थकान नहीं बल्कि पहली बार यहां पहुंचने का अजीब सुकून था।

विश्व का प्राचीनतम लोकतंत्र माना जाता है मलाणा 

governor of himachal acharya devvrat on malana kullu tour

चरस के लिए बदनाम रहे मलाणा गांव को विश्व का सबसे प्राचीनतम लोकतंत्र माना जाता है। यहां के आराध्य देवता जमदग्नि ऋषि के आदेश पर फैसले लिए जाते हैं। देवता का फैसला सभी को सर्वमान्य होता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मलाणा क्रीम के नाम से प्रचलित चरस के लिए भी यहां देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं।  

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