राजभवन के इस एक सवाल पर फंस गई है वीरभद्र सरकार
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विवादित टीसीपी संशोधन विधेयक को मंजूरी देने से पहले राजभवन की ओर से लगाई छह आपत्तियों में से एक का जवाब देने में प्रदेश सरकार फंस गई है। राजभवन ने सरकार से जानना चाहा है कि इतने बड़े स्तर पर अवैध निर्माण सरकारी तंत्र की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
इसके लिए जिम्मेदार अफसरों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही के लिए सरकार ने क्या कदम उठाने का निर्णय लिया है? इस सवाल का जवाब देते नहीं बन रहा है। सूत्रों के अनुसार इसका गोलमोल जवाब तैयार किया है।
पहली आपत्ति पर राजभवन ने न्यायालय के आदेशों पर विचार करने की बात कही थी? सूत्र बताते हैं कि इसमें सरकार ने जवाब तैयार किया है कि 27 अगस्त 2016 को विधानसभा में बिल पास हुआ जबकि 29 अगस्त को हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया।
जवाब तैयार करने को विधि विभाग को भेजी फाइल
अगर बिल पारित होने से पहले हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया होता तो इसे पारित के लिए विधानसभा नहीं भेजा जाता। दूसरी आपत्ति में सरकार ने ग्रीन एरिया में भवन नियमित न करने की हामी भरी है। भविष्य में अवैध निर्माण को रोकने के लिए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है।
इसमें इंजीनियरों से स्ट्रक्टर स्टेबिलिटी प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य किया है। अगर भवन गिरता है तो उसकी जिम्मेदारी इंजीनियर की होगी। एक और प्रश्न के उत्तर में सरकार ने जवाब तैयार किया है कि अगर कोई भवन मालिक फिर से अवैध निर्माण करता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के अलावा जेल भेजने तक का प्रावधान किया है।
सरकार ने विधि विभाग को भेजी फाइल
प्रदेश सरकार की ओर से जवाब तैयार करने के बाद शुक्रवार शाम इसे विधि विभाग को भेजा गया। यहां से फाइल राजभवन को भेजी जाएगी। इसके बाद राज्यपाल टीसीपी संशोधन विधेयक पर फैसला लेंगे।