NDRF पर ड्रामा कर रही सरकार : धूमल
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उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में जिला कांगड़ा की नूरपुर तहसील के कोपड़ा में एनडीआरएफ बटालियन स्थापित करने के लिए भूमि का चयन किया गया था। 23 हेक्टेयर निजी भूमि तथा 17 हेक्टेयर सरकारी गैर-वनभूमि इसके लिए चुनी गई थी। अन्य औपचारिकताओं के तहत भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 और 6 में अधिसूचना भी हो गई थी।
स्थानीय लोगों की सहमति मिल जाने के उपरांत वर्ष 2012 में अवार्ड भी फाइनल हो गया था। पूर्व सरकार ने सभी पहलुओं को देखकर ही इस स्थल का चयन किया था। कांगड़ा जिला भूकंप की दृष्टि से अति-संवेदनशील है। प्रस्तावित बटालियन से 3 राज्यों हिमाचल, पंजाब और जम्मू कश्मीर की जरूरतों को पूरा किया जाना था।
लोगों का विरोध बताकर लटकाया मामला
विधायक रविंद्र रवि के प्रस्ताव पर यह मामला विधानसभा में उठा था और संबंधित मंत्री ने इस बारे में यह कहकर गुमराह करने का प्रयास किया था कि कोपड़ा पंचायत में कुछ लोगों का विरोध है।
ये बयान तथ्यों पर आधारित नहीं था। ये तथ्य सामने आने के बाद सरकार बटालियन को किसी और स्थान पर ले जाने का निर्णय नहीं ले सकी। न ही सरकार ने बटालियन को कोपड़ा में स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को सलाह दी है कि यदि सरकार के मन में भेदभाव का यह विचार न आता तो आज तक बटालियन नूरपुर में स्थापित हो गई होती। उन्होंने कहा कि सरकार को केंद्र से नई मांग करने की जरूरत नहीं है, पुराने प्रस्ताव को ही सरकार आगे बढ़ाए, क्योंकि यह अंतिम चरण में है।