सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित पेंशन दें : हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को आदेश दिए हैं कि इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन, मिल्क फेडरेशन, हिम फेडरेशन, ऑकलैंड स्कूल और स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के सेवानिवृत्त याचिकाकर्ता कर्मियों को संशोधित उच्च पेंशन अदा करते रहें।
कोर्ट ने ईपीएफओ द्वारा इन याचिकाकर्ता पेंशन भोगियों की पेंशन को कम करने के मामले में यह आदेश पारित किए हैं। मामले पर सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने आदेशों में स्पष्ट किया है कि प्रार्थियों की याचिकाएं खारिज होने की सूरत में उन्हें बढ़ी हुई अतिरिक्त पेंशन वापस करनी होगी।
पेंशन कम करने के पीछे यह कारण दिया गया है कि इंपलाइज प्रोविडेंट फंड पेंशन स्कीम में किए गए 22 अगस्त 2014 के संशोधन के मुताबिक न तो लिखित में विकल्प और न ही 1.16 प्रतिशत के अंशदान को कर्मचारी पेंशन के पैरा 11 (4) के तहत निर्धारित समय अवधि 1 सितंबर 2015 से पहले कर्मचारी
भविष्य निधि संगठन के पास जमा किया गया है। इस कारण अब तक उन्हें पूर्ण वेतन पर वितरित की गई पेंशन अनाधिकृत है तथा अधिनियम के तहत कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के पैरा 11 (4) में निहित वैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।
यह है मामला
16 नवंबर 1995 से भविष्य निधि संगठन ने अपने अंशधारकों के लिए पेंशन स्कीम शुरू की थी। स्कीम में प्रावधान था कि कर्मचारी और नियोक्ता इस योजना में नियोक्ता के अंशदान में से कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई भत्ते की कुल राशि का 8.33 फीसदी या 5000 रुपये में से अधिकतम का 8.33 फीसदी हिस्सा ही जमा करवा सकता था।
बाद में 6500 रुपये और 15000 रुपये किया गया। योजना में वर्ष 1996 में भविष्य निधि संगठन ने एक संशोधन किया जिसके तहत कर्मचारी और नियोक्ता अगर चाहे तो नियोक्ता के हिस्से में से इस पेंशन स्कीम में कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई भत्ते की कुल राशि का 8.33 फीसदी हिस्सा बिना किसी अधिकतम सीमा के जमा करवा सकते थे।
इसी के अनुरूप इन्हें बढ़ी हुई पेंशन मिलनी थी। इस संशोधन का पता कर्मचारियों को उस समय नहीं चला, लेकिन जब पता चला तो कर्मचारियों ने इस मामले को अपने नियोक्ताओं के माध्यम से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के समक्ष उठाया। संगठन ने कर्मचारियों की इस मांग को अस्वीकार कर दिया। जिसके चलते कर्मचारियों को कोर्ट की शरण में जाना पड़ा।