Bilaspur News: कत्था फैक्ट्री की टंकी फटने से गंभरोला खड्ड का पानी लाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने की सील
फैक्टरी में रखी करीब दो हजार लीटर की टंकी के ऊपर अचानक लकड़ी गिरने से टंकी फट गई। कत्था बह कर खड्ड के पानी में मिल गया।
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हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले की उपमंडल सदर की पंचायत दयोथ के भजूण गांव में कत्था फैक्ट्री की टंकी फट गई। टंकी में रखा 2000 लीटर तरल कत्था गंभरोला खड्ड में बह गया। इससे खड्ड का पानी लाल रंग का हो गया। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्ट्री को सील कर दिया है। जानकारी के अनुसार गुरुवार दोपहर को चिल्ला पुल से लोगों ने खड्ड में लाल रंग का पानी बहता देखा। खड्ड का लाल पानी देख लोग अचंभित हो गए। इस बीच काफी समय तक लोग कई तरह के कयास लगाते रहे। सूचना प्रशासन तक पहुंची। उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और विशेषज्ञ भी मौके पर पहुंचे।
काफी देर तक जांच करने पर पता चला कि कत्था फैक्ट्री से तरल कत्था बहकर खड्ड में मिल गया है। पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी फैक्ट्री पहुंचे। जांच में पाया गया कि गांव भजूण के सुखराम की कत्था फैक्ट्री में रखी करीब दो हजार लीटर की टंकी फट गई। जांच में यह भी पाया गया कि कत्थे को बहने से रोकने के लिए फैक्ट्री में पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। बताया जा रहा कि इस कत्थे के 100 ग्राम मिश्रण से भी एक बड़ी पानी की बाल्टी का रंग लाल हो जाता है। फैक्ट्री मालिक को भी इस घटना से नुकसान हुआ है।
उपायुक्त बिलासपुर आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि कत्था फैक्ट्री का टैंक फटने के कारण कत्था गंबरोला खड्ड के पानी में मिल गया। कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री को बंद कर दिया गया है। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए है। इस खड्ड पर बनी जलापूर्ति योजनाओं को बंद कर दिया है।
खड्ड पर आधारित पेयजल योजनाओं को नहीं खतरा
उपमंडल सदर की ग्राम पंचायत दयोथ के भजूण गांव में कत्था फैक्ट्री से गंभरोला खड्ड में बहे तरल कत्थे से क्षेत्र की पेयजल योजनाओं को कोई खतरा नहीं है। जल शक्ति विभाग के अनुसार इस खड्ड पर खुई-मैथी पेयजल योजना और परोही पेयजल योजना अधारित है। लेकिन जिस जगह खड्ड में तरल कत्था मिला है, वहां से खुई-मैथी योजना ऊपर की ओर है, जिससे यह योजना सुरक्षित है जबकि परोही पेयजल योजना के लिए बरसात में इस खड्ड से पानी नहीं उठाया जाता है।
बरसात में इस योजना के लिए पानी बरसाती नाले से लिया जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिलासपुर के क्षेत्रीय अधिकारी अतुल परमार ने बताया कि खड्ड से पानी के सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा जाएगा। चिंता का कोई विषय नहीं, लेकिन कोई भी पदार्थ पानी में जरूरत से ज्यादा मिलाया जाए तो पानी को प्रदूषित करता ही है। पशुपालन विभाग के सहायक प्रसार निदेशक डॉ. सतीश कपूर ने बताया कि हो सकता है कि कत्था युक्त पानी पशुओं के लिए हानिकारक हो। इसलिए पशुपालक खड्ड फिलहाल के लिए अपने पशुओं को दूर रखें।