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डीडीयू में गायनी मरीजों को मिली डॉक्टर
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अरसे से खाली चल रहा यह पद, ओपीडी हर आती हैं 50 से अधिक महिला मरीज
शिमला। राजधानी शिमला के डीडीयू अस्पताल में महिला मरीजों को अब इलाज के लिए केएनएच का रुख नहीं करना होगा। सरकार ने अस्पताल में गायनी के डॉक्टर की तैनाती कर दी है। इससे शहर समेत आसपास की महिला मरीजों को उपचार के लिए परेशानी नहीं झेलनी होगी।
क्षेत्रीय अस्पताल डीडीयू में गायनी के डॉक्टर का पद कोरोना के दूसरे दौर से खाली चल रहा है। हालांकि इस दौरान गायनी के ऑपरेशन यहां पर बंद थे लेकिन अब चूंकि ओपीडी शुरू हो गई थी तो शहर समेत आसपास से इलाज के लिए औसतन 50 महिला मरीज इलाज के लिए आ रही है। डॉक्टर न होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें अधिकांश महिला मरीजों को केएनएच के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। वहीं देरी से पहुंचने के बाद केएनएच में लंबी भीड़ के चलते महिला मरीजों को अगले दिन इलाज के लिए आना पड़ रहा था। अब केएनएच से ही एक डॉक्टर की तैनाती डीडीयू के लिए कर दी है तो ऐसे में महिला रोगियों की समस्या कुछ हद तक कम हो गई है।
डीडीयू में इलाज को तवज्जो देती है महिलाएं
शहर का नजदीकी अस्पताल होने के कारण अधिकांश महिला रोगी डीडीयू अस्पताल में ही इलाज को तवज्जो देती है। दूसरी ओर केएनएच में भी महिला रोगियों की संख्या कम हो जाएंगी।
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शिमला। राजधानी शिमला के डीडीयू अस्पताल में महिला मरीजों को अब इलाज के लिए केएनएच का रुख नहीं करना होगा। सरकार ने अस्पताल में गायनी के डॉक्टर की तैनाती कर दी है। इससे शहर समेत आसपास की महिला मरीजों को उपचार के लिए परेशानी नहीं झेलनी होगी।
क्षेत्रीय अस्पताल डीडीयू में गायनी के डॉक्टर का पद कोरोना के दूसरे दौर से खाली चल रहा है। हालांकि इस दौरान गायनी के ऑपरेशन यहां पर बंद थे लेकिन अब चूंकि ओपीडी शुरू हो गई थी तो शहर समेत आसपास से इलाज के लिए औसतन 50 महिला मरीज इलाज के लिए आ रही है। डॉक्टर न होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें अधिकांश महिला मरीजों को केएनएच के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। वहीं देरी से पहुंचने के बाद केएनएच में लंबी भीड़ के चलते महिला मरीजों को अगले दिन इलाज के लिए आना पड़ रहा था। अब केएनएच से ही एक डॉक्टर की तैनाती डीडीयू के लिए कर दी है तो ऐसे में महिला रोगियों की समस्या कुछ हद तक कम हो गई है।
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डीडीयू में इलाज को तवज्जो देती है महिलाएं
शहर का नजदीकी अस्पताल होने के कारण अधिकांश महिला रोगी डीडीयू अस्पताल में ही इलाज को तवज्जो देती है। दूसरी ओर केएनएच में भी महिला रोगियों की संख्या कम हो जाएंगी।
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