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Himachal: छात्र अगले साल से हिमाचल के प्राचीन मंदिरों और स्वतंत्रता आंदोलन का पढ़ेंगे इतिहास

Wed, 21 Jan 2026 12:19 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 21 Jan 2026 12:19 PM IST
सार

प्रदेश में छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी राष्ट्र के इतिहास के साथ-साथ हिमाचल की संस्कृति, प्राचीन मंदिरों और स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में भी पढ़ेंगे।

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From next year, students in Himachal Pradesh will study the history of ancient temples and the freedom movemen
एससीईआरटी सोलन में हुई बैठक। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी राष्ट्र के इतिहास के साथ-साथ हिमाचल की संस्कृति, प्राचीन मंदिरों और स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में भी पढ़ेंगे। शैक्षणिक सत्र 2027-28 के पाठ्यक्रम में इतिहास की किताब में पझौता आंदोलन के अलावा हिमाचल का इतिहास भी पढ़ाया जाएगा। प्रदेश सरकार समेत शिक्षा निदेशालय ने इस पर कार्य शुरू कर दिया है। मंगलवार को एससीईआरटी सोलन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान पाठ्यक्रम को लेकर शिक्षा विभाग ने पहला ड्राफ्ट शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के समक्ष पेश किया। इसमें मंत्री ने भी कई सुझाव दिए।

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ड्राफ्ट में बताया गया कि छठी से आठवीं कक्षा तक इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव किया जा रहा है। इसमें इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि पुस्तकों में किताबी ज्ञान के साथ रचनात्मक सोच, जीवन से जुड़े कौशल, प्रदेश की संस्कृति, कला, साहित्य, प्राचीन मंदिरों, किलों और प्रजामंडल एवं सिरमौर के पझौता आंदोलन जैसे स्वतंत्रता संग्राम के विषयों को शामिल किया जाए। स्वतंत्रता संग्राम में अपनी वीरता के माध्यम से देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले वीरों की विस्तृत जानकारी भी पाठ्यक्रम में होगी, ताकि युवा पीढ़ी इसे जान सके।
 

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यह था पझौता का आंदोलन
पाठ्यक्रम में प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों, लोक कलाओं और महत्वपूर्ण व्यक्तियों के साथ-साथ हिमाचल पर केंद्रित प्रागैतिहासिक काल से लेकर हिमाचल के राज्य बनने तक की सारगर्भित जानकारी भी होगी। शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में एससीईआरटी समेत अन्य टीम के सदस्य हिमाचल इतिहास को लेकर शिक्षण सामग्री को जुटा रहे हैं। जब भी भारत छोड़ो आंदोलन की बात होती है, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला में हुए पझौता आंदोलन की याद ताजा हो जाती है। यहां मुठ्ठी भर लोग अंग्रेज सरकार व उसकी मददगार स्थानीय रियासत के आगे खड़े हो गए थे। चंद लोगों से शुरू हुआ पझौता आंदोलन कुछ ही समय में गांव-गांव तक पहुंच गया था। 1942 में जब महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया तो लोगों का उत्साह बढ़ गया। आंदोलन का नेतृत्व वैद्य सूरत सिंह के साथ चेत सिंह, बस्तीराम पहाड़िया, गुलाब सिंह व मान सिंह ने किया। यह आंदोलन पझौता क्षेत्र से शुरू हुआ था, इसलिए इसे पझौता आंदोलन नाम दिया।

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गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए शिक्षक प्रशिक्षण जरूरी : रोहित
 राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) सोलन में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने की। बैठक में एससीईआरटी के कार्यों का समग्र अवलोकन, प्रगति कार्ड एवं परख की विस्तृत रिपोर्ट की समीक्षा के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के समृद्ध इतिहास और संस्कृति को विद्यालय पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने पर चर्चा की गई। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सभी छात्रों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के लिए अध्यापकों का प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम का स्तर उच्च होना आवश्यक है। इस दिशा में एससीईआरटी और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डाइट) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अध्यापक प्रशिक्षण को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाकर, आधुनिक पठन-पाठन सामग्री अपनाकर और तकनीक के माध्यम से शत-प्रतिशत गुणवत्तायुक्त शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
 

रोहित ने कहा कि तीन वर्षों में प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में कई निर्णायक सुधार लागू किए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता के आकलन में हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार करते हुए 21वें स्थान से पांचवां स्थान प्राप्त किया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा पठन-पाठन सामग्री और मूल्यांकन प्रक्रियाओं के लिए व्यवस्थित अधोसंरचना उपलब्ध करवाई जा रही है, ताकि छात्रों के संपूर्ण विकास के लिए प्रत्येक स्तर पर उपयुक्त विषय सामग्री सुनिश्चित की जा सके। इस अवसर पर एससीईआरटी सोलन की प्राचार्य डॉ. रीतू शर्मा सोनी ने मुख्यातिथि का स्वागत किया। बैठक में हिमाचल प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सर्वजोत सिंह बहल, शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष कोहली, समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. अमरजीत शर्मा, अतिरिक्त निदेशक स्कूल शिक्षा बीआर शर्मा सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
 

क्लस्टर से स्कूल हो रहे विकसित
प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। स्वतंत्रता के समय 7 प्रतिशत रही साक्षरता दर अब बढ़कर 99.03 प्रतिशत तक पहुंच गई है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ किए गुणात्मक सुधारों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है। संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए क्लस्टर स्कूल प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत 300 से 500 मीटर की परिधि में स्थित विद्यालयों को एक क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है। इससे पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, खेल सामग्री और शिक्षकों की विशेषज्ञता का साझा उपयोग संभव हो सका है।

दूसरी सूची में 30 स्कूल सीबीएसई में जोड़े
रोहित ठाकुर ने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले स्कूलों के लिए विशेष कैडर बनाया जा रहा है। प्रदेश में पहले चरण में 100 सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से जोड़ा गया है, जबकि दूसरे चरण में 30 और स्कूलों को सीबीएसई में शामिल किया गया है। इसके तहत शिक्षकों का भी अलग से कैडर गठित किया जाएगा।

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