{"_id":"590589224f1c1bcf3a440f8a","slug":"four-new-cases-of-lung-disease-silicosis-in-himachal","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस लाइलाज बीमारी के चार नए मामले, सुप्रीम कोर्ट ने किया है अलर्ट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस लाइलाज बीमारी के चार नए मामले, सुप्रीम कोर्ट ने किया है अलर्ट
सरोज पाठक/अमर उजाला, बरमाणा (बिलासपुर)
Updated Sun, 30 Apr 2017 12:20 PM IST
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हिमाचल प्रदेश में फेफड़ों की लाइलाज बीमारी सिलिकोसिस के चार नए मामले सामने आए हैं। सीमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले इन चारों मजदूरों की सैंपल रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। मदद संस्था ने बरमाणा के उप स्वास्थ्य केंद्र गुग्गा भटेड़ में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया।
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शिविर में सिपला के रैसिपरेटर व टेक्नीशियन अश्वनी पठानिया ने करीब 18 लोगों के सैंपल लिए, जिसमें चार मजदूरों में सिलिकोसिस बीमारी पाई गई। सुप्रीम कोर्ट इस बीमारी को लेकर राज्य सरकारों को अलर्ट कर चुका है। सिलिका कणों और टूटे पत्थरों की धूल की वजह से सिलिकोसिस होती है।
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धूल सांस के साथ फेफड़ों तक जाती है और धीरे-धीरे यह बीमारी अपने पांव जमाती है। यह खासकर पत्थर के खनन, रेत, बालू के खनन, पत्थर तोड़ने के क्रशर, कांच, उद्योग, मिट्टी के बर्तन बनाने के उद्योग, पत्थर को काटने और रगड़ने जैसे उद्योगों के मजदूरों में पाई जाती है।
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इसके साथ ही स्लेट, पेंसिल बनाने वाले उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों को भी सिलिकोसिस अपनी गिरफ्त में लेती है। जहां इस तरह का काम बड़े पैमाने पर होते है, वहां काम करने वाले मजदूरों के अलावा आसपास के लोगों को भी खतरा होता है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट कुछ राज्यों को सिलिकोसिस के प्रति लोगों को जागरूक करने के आदेश दे चुका है।
मास्क भी नहीं रोक पाते सिलिका कणों को
यह एक लाइलाज बीमारी है। इसे रोकने का आज तक कोई कारगर तरीका नहीं बनाया जा सका है। कंपनियों में मजदूरों को दिए जाने वाले मास्क भी बारीक कणों को सांस के द्वारा अंदर जाने से रोक पाने में सक्षम नहीं हैं। दरअसल, यह सिलिका कण सांस से
फेफड़ों के अंदर तक तो पहुंच जाते हैं लेकिन बाहर नहीं निकल पाते। इसका नतीजा यह होता है कि वह फेफड़ों पर धीरे-धीरे जम कर एक मोटी परत बना लेते हैं। इससे फेफड़े ठीक से फैलना और सिकुड़ना बंद कर देते हैं, जिससे सांस लेने में काफी तकलीफ होती है। धीरे-धीरे आदमी की मौत हो जाती है।
अभी ध्यान में नहीं आया मामला: डीसी
उपायुक्त बिलासपुर ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि उनके ध्यान में अभी यह मामला नहीं आया है। उन्होंने कहा कि लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। संस्था के प्रधान बलराम शर्मा ने प्रदेश सरकार व स्वास्थ्य मंत्री ने मांग की है कि इस रोग के प्रति जागरूक करने के लिए कंपनियों को उचित आदेश दिए जाएं।
आईजीएमसी में आए हैं 27 मामले
हमीरपुर से शिविर में आए एमडी डॉक्टर आशीष ने कहा कि चार मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट को फेफड़ों से संबंधित चिकित्सक और जिला प्रशासन को भेजा जाएगा ताकि इस मामले में उचित कार्रवाई की जा सके। आईजीएमसी शिमला में तैनात डॉ. मलाय सरकार ने बताया कि आईजीएमसी में अभी तक सिलिकोसिस के 27 मरीज सामने आए हैं।
आईजीएमसी में सालाना लगभग 10 से 15 मामले आ रहे हैं। इस रोग की चपेट में आने वाले अधिकतर उद्योगों में करने वाले कामगार हैं। विभाग इस पर नजर रखे हुए है। - डॉ. आरएस नेगी, श्वास रोग विशेषज्ञ, आईजीएमसी शिमला