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NH के काम को झटका, फोरलेन संघर्ष समिति ने किया बड़ा एलान

Mon, 12 Sep 2016 10:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 12 Sep 2016 10:19 AM IST
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Four-lane Sangharsh Samiti call for higher compensation of NH land acquisition

प्रदेश भर में प्रस्तावित व चल रहे नेशनल हाईवे के विस्तारीकरण के काम को बड़ा झटका लग सकता है। फोरलेन विस्थापितों के संगठन फोरलेन संघर्ष समिति ने मुआवजा तय न होने तक प्रभावितों की जमीन पर बुलडोजर न चलने देने का ऐलान कर दिया है। फोरलेन विस्थापितों ने साफ कहा है कि अब केंद्र व राज्य सरकार के प्रतिनिधि एक ही प्लेटफार्म पर आकर किसानों से मुआवजे के संबंध में बात करें।

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जब तक किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलता तब तक कहीं भी काम नहीं होने दिया जाएगा। समिति के प्रदेश अध्यक्ष रिटायर्ड ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने रविवार को शिमला में मीडिया से कहा कि इसके लिए प्रदेश भर में जहां जहां नेशनल हाईवे का निर्माण होना प्रस्तावित है, ऐसे हर इलाके के गांवों में जाकर किसानों व ग्रामीणों को जोड़कर उन्हें अपने साथ लिया जाएगा।
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रविवार को शिमला प्रेस क्लब में संघर्ष समिति से जुड़े सोलन, चमेरा, बिलासपुर, परवाणू, शिमला और कुल्लू के किसानों व फोरलेन प्रभावितों की पहली संयुक्त बैठक हुई। बैठक के बाद खुशाल ठाकुर ने कहा कि सरकार की नीयत शुरू से ही खराब है। यही कारण है कि भूमि अधिग्रहण के लिए बने कानून का सही तरीके से पालन किया जा रहा है।
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ठाकुर ने कहा कि अब तक कहीं भी डिमार्केशन तक नहीं की गई। मौजूदा मार्केट रेट का प्रावधान होने के बावजूद सरकार 2013 के सर्किल रेट के आधार मुआवजा देने की बात कह रही है। साथ ही इसमें भी वह फैक्टर एक लागू कर दोगुना मुआवजा देने की बात कर रही है जबकि केंद्र सरकार फरवरी में ही चार गुणा मुआवजा देने के लिए ग्रामीण इलाकों में फैक्टर दो लागू करने की नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है।

खुशाल ने सरकार की ओर से की जा रही बातचीत को भी मजाक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे अफसरों को मुआवजे पर बातचीत करने को भेजती है जिनके पास शक्ति ही नहीं है। वह हमसे तो रेट पूछते हैं, लेकिन खुद सरकार द्वारा क्या रेट देने का विचार है यह बता नहीं पाते। ऐसे में सरकार को ऐसे अधिकारियों नेताओं के जरिये बात करनी चाहिए जो मौके पर ही फैसला लेने के लिए अधिकृत हो।

सर्किल रेट की विसंगतियां दूर करने को बने कमेटी
खुशाल ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में सर्किल रेट में भारी विसंगतियां हैं। एक जगह पर रेट अगर दस हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है तो उससे एक किलोमीटर की दूरी पर ही रेट कई गुना ज्यादा या कम है। ऐसे में लोगों को ग्रामीण या शहरी श्रेणी में होने के बावजूद मुआवजा मिलने में असमानता का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार एक कमीशन या कमेटी बनाकर इस विसंगति को दूर करे ताकि प्रभावितों को सही मुआवजा मिल सके।

फैक्टर बाद में, पहले बेस रेट तय करे सरकार
संघर्ष समिति के धर्मेंद्र ठाकुर ने कहा कि मुआवजा फैक्टर एक के हिसाब से देना है या फैक्टर दो से, यह बाद में तय होगा। पहले सरकार हमारी जमीन का बेस रेट तय करे जिसे एक्ट के मुताबिक वर्तमान मार्केट रेट के आधार पर तय किया जाना है। जब तक सरकार बेस रेट तय करने में खेल करेगी और अपनी मर्जी से सर्किल रेट के आधार पर बेस रेट तय कर मुआवजा देने की बात कहेगी, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।


5 लाख बिस्वा की जमीन का 13,000 रुपये दे रही सरकार
ठाकुर ने कहा कि कुल्लू, मनाली जैसी जगह जहां पांच से सात लाख रुपये बिस्वा रेट चल रहे हैं, वहां पर सरकार सर्किल रेट का बहाना बनाकर महज 13 से 15 हजार रुपये के हिसाब से मुआवजा देने की बात कह रही है। अगर सरकार अपने रवैये पर अड़ी रही तो प्रदेश में एक भी नया प्रोजेक्ट न तो शुरू हो पाएगा और न ही पुराने प्रोजेक्ट पूरे हो पाएंगे।

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