पंडित जी कहीं ज्यादा दूर तो नहीं चले गए, आज भी कानों में गूंजते हैं अटल जी के शब्द
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंडित जी कहीं ज्यादा दूर तो नहीं चले गए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ये शब्द आज भी मानों कानों में गूंजते प्रतीत होते हैं। यह कहना है सहायक अभियंता पद से सेवानिवृत्त कुल्लू जिले के सेउबाग निवासी कृष्ण गोपाल शर्मा का।
कहते हैं कि वर्ष 2003 में उनका तबादला हो चुका था, लेकिन प्रधानमंत्री के आगमन पर एक बार फिर प्रीणी में ड्यूटी के लिए जाना पड़ा। बातों ही बातों में उन्हें मेरी ट्रांसफर का पता चला तो उन्होंने मजाकिया लहजे में कुछ इस तरह कहा था।
उन्हें उच्च अधिकारियों के साथ कई बार अटल जी को नजदीक से देखने का मौका मिला। कृष्ण गोपाल शर्मा उस समय विकास खंड कार्यालय में कनिष्ठ अभियंता के पद पर कार्यरत थे। अटल के निधन के बाद कृष्ण गोपाल और उनकी पत्नी ने व्रत रखा तथा अंतिम संस्कार के बाद ही खाना खाया।
बीमारी के चलते प्रीणी नहीं आ पाए अटल
सेवानिवृत्ति के बाद भी किताबों और बागवानी में व्यस्त रहने वाले कृष्ण गोपाल बताते हैं कि एक बार वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आवास में लाइब्रेरी को निहार रहे थे तो वाजपेयी ने मानों उनका मन पढ़ लिया हो।
उन्होंने मेज पर रखी एक किताब उठाई और उनके हाथ में थमाते हुए कहा, इसे जरूर पढ़ना। कृष्ण गोपाल के मुताबिक यह पुस्तक उनके लिए बड़े पुरस्कार से कम नहीं थी।
वे महान शख्सियत की इस आत्मीयता से अभिभूत हो गए थे। मनाली के प्रीणी गांव में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आवास एक दशक से उनकी राह देख रहा था, लेकिन बीमारी के चलते वे यहां नहीं आ सके।
गत वीरवार को दिल्ली से उनके देहावसान की खबर आई तो प्रीणी गांव में भी सन्नाटा पसर गया। प्रीणीवासियों और अटल के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान कुल्लू जिले में तैनात कई अधिकारियों के जहन में आज भी उनसे जुड़ी कई यादें ताजा हैं।