पढ़िए सिंघी केस पर भंडारी का चौंकाने वाला बयान
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पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी ने एक बार फिर प्रदेश सरकार को भ्रष्टाचार के मामलों पर घेरा है। शिमला में प्रेस वार्ता में उन्होंने सरकार से पूछा कि पूर्व कैबिनेट मंत्री सिंघी राम के खिलाफ केस को किस आधार पर वापस लिया जा रहा है।
सीआरपीसी की धारा 321 में जनहित में केस वापस लेने का प्रावधान है, पर इस केस में कौन सा पब्लिक इंट्रस्ट है? भंडारी ने बताया कि 6 साल पहले उन्होंने और उनकी टीम ने इस मामले की जांच की और आरोपियों को इंटेरोगेट किया।
मामले को अंजाम तक पहुंचाया और केस को पुख्ता बनाया। आज जब मामला फैसले के करीब पहुंचा तो सरकार इसे वापस ले रही है।
सिंघीराम ने बेटी का जाली सर्टिफिकेट बनाया था
सिंघीराम पर बेटी का जाली सर्टिफिकेट बनाकर उसे टॉपर से 40 अंक ज्यादा दिलाने के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार का भ्रष्टाचार से लड़ने का यही तरीका है तो प्रदेश में कोई भी भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं लड़ सकता।
भंडारी ने कहा कि अभियोजन की मंजूरी का इस्तेमाल पर्सनल इंट्रस्ट के लिए होता है। पुलिस विभाग में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप को भी उन्होंने विभाग के लिए खतरनाक बताया।
आज पुलिस में 90 प्रतिशत तबादले राजनीतिक हस्तक्षेप से हो रहे हैं। यह काम पुलिस एस्टेब्लिशमेंट कमेटी का है।
कहा, मानसिक दबाव में पुलिस अफसर
तबादले का काम पुलिस एस्टेब्लिशमेंट कमेटी का है। डीजी की अध्यक्षता वाली यह कमेटी मात्र रबड़ स्टैंप बन कर रह गई है। पूरे सिस्टम को हाईजेक कर रखा है। पुलिस विभाग में एसएचओ, आईजी और एसीपी स्तर पर कोई भी निष्पक्ष कार्य नहीं कर पा रहे हैं।
अधिकतर अधिकारी मानसिक दबाव में कार्य कर रहे हैं। भंडारी ने हाल ही में हादसे के शिकार हुए एसपी चंद्रशेखर के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि उनकी मौत सामान्य नहीं बल्कि मानसिक दबाव और परेशानी के कारण हुई।
उन्हें लोअर रैंक पर तैनात किया गया। कोर्ट से जीते तो चंबा बॉर्डर पर लगा दिया।
कांग्रेस चार्जशीट तक सीमित विजिलेंस
भंडारी ने कहा कि विजिलेंस की जांच कांग्रेस चार्जशीट आधारित मामलों तक सीमित हो गई है।
उन्होंने बताया कि विजिलेंस को सरकार ने गलत निर्देश देकर अपने काम से भटकाया है।
जब वह विजिलेंस के प्रमुख थे तो, उन्होंने एक पार्टी की चार्जशीट के मामलों की जांच करने से इनकार कर दिया था।